Haryana Municipal election:क्या किसान आंदोलन के चलते BJP को लगा झटका, कांग्रेस कितने फायदे में ?
Haryana Municipal election result:हरियाणा में रविवार को हुए नगर निकाय चुनाव (Haryana Municipal Election) के नतीजे बीजेपी(BJP) के पक्ष में नहीं आए हैं और ज्यादातर जगहों पर उसे जोर का झटका लगा है। कांग्रेस(Congress) दावा कर रही है कि यह किसानों के विरोध के चलते हुआ है, जबकि जिन निकायों में बीजेपी को जीत मिली है, वहां के लिए पार्टी के प्रदेश के नेता उसे विकास की जीत बताने की कोशिश कर रहे हैं। हरियाणा में रविवार को तीन नगर निगमों, एक नगर परिषद और तीन नगरपालिकाओं के मेयर, नगर परिषद और नगरपालिका अध्यक्ष के पदों के लिए इस बार सीधे चुनाव करवाए गए थे, जिसमें करीब 60 फीसदी वोटिंग हुई थी।

भाजपा को बड़ा झटका
अगर नगर निगमों की बात करें तो सिर्फ पंचकूला नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी कुलभूषण गोयल ने मेयर पद का चुनाव जीता है, जबकि सोनीपत में कांग्रेस के निखिल मदान और अंबाला नगर निगम में मेयर पद पर हरियाणा जन चेतना पार्टी की शक्ति रानी शर्मा की जीत हुई है। बीजेपी को एक और कामयाबी बस ये मिली है कि उसकी प्रत्याशी पूनम यादव रेवाड़ी नगर परिषद के अध्यक्ष पद का भी चुनाव जीत गई हैं। बाकी तीनों नगरपालिकाओं के अध्यक्ष के पदों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी है। रोहतक के सांपला में निर्दलीय पूजा जीती हैं, वहीं रेवाड़ी के धारूहेड़ा में निर्दलीय कंवर सिंह जीते हैं। जबकि,हिसार के उकलाना में निर्दलीय प्रत्याशी सुशील कुमार साहू विजयी रहे हैं।

किसान आंदोलन के चलते सोनीपत में जीती कांग्रेस!
माना जा रहा था कि इस चुनाव में सत्ताधारी बीजेपी और जेजेपी गठबंधन और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होगा। क्योंकि,इस महीने की शुरुआत में भारतीय राष्ट्रीय लोक दल (INLD) ने किसानों पर केंद्र और राज्य की बीजेपी-जेजेपी सरकार के कथित अत्याचार के विरोध में चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया था। लेकिन, चुनाव नतीजे भाजपा के पक्ष में तो नहीं ही कहे जा सकते, कांग्रेस के लिए भी इसमें बहुत ज्यादा कुछ नजर नहीं आ रहा है। जबकि, इन दोनों से अलग निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। हालांकि, सोनीपत में कांग्रेस की जीत अच्छी रही है, जहां उसके प्रत्याशी निखिल मदान करीब 14,000 वोटों से जीतकर वहां के पहले मेयर बने हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह किसानों के विरोध का नतीजा है, क्योंकि सोनीपत सिंघु बॉर्डर (Singhu Border)के पास है, जहां पंजाब के किसान बीते एक महीने से कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।

पंचकूला और रेवाड़ी में बीजेपी जीती
भाजपा-जेजेपी (BJP-JJP) गठबंधन दो-दो नगर निगम और तीनों नगर पालिकाएं गंवा चुकी है, लेकिन पंचकूला की जीत को हरियाणा में भाजपा के चुनाव प्रभारी कैप्टन अभिमन्यू (Captain Abhimanyu) विकास की जीत बता रहे हैं। भाजपा रेवाड़ी नगर परिषद का अध्यक्ष पद भी जीतकर भी खुश हो सकती है, लेकिन यहां उसकी प्रत्याशी पूनम यादव की जीत का मार्जिन बहुत ज्यादा नहीं है। उन्हें 25,965 वोट मिले हैं, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी उपमा यादव को 23,878 वोट मिले हैं। रेवाड़ी नगर परिषद की 31 सीटों में से भी 23 सीटों पर निर्दलीय पार्षदों की जीत हुई है, जबकि 7 सीटों पर ही बीजेपी के पार्षद जीत कर आए हैं।

अपना गढ़ भी नहीं बचा सके दुष्यंत चौटाला
लेकिन, हिसार के उकलाना और रेवाड़ी के धारूहेड़ा में निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और उनकी जननायक जनता पार्टी के लिए बड़ा निजी झटका माना जा सकता हैं, क्योंकि इस इलाके को वे अपना गढ़ मानते हैं और उनकी पार्टी यहां भी नहीं जीत सकी। अंबाला नगर निगम में मेयर पद का चुनाव हरियाणा जनचेतना पार्टी की शक्ति रानी शर्मा 8 हजार वोटों से जीती हैं। वो एचजेपी(HJP) चीफ और पूर्व कांग्रेस नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री विनोद शर्मा की पत्नी हैं। इनका ही बेटा मनु शर्मा बहुचर्चित जेसिका लाल का हत्यारा है, जिसे उस केस में सजा हो चुकी है।












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