हरियाणा: करनाल में CM खट्टर के लिए BJP देख रही है बहुत बड़ी जीत, जानिए कितना होगा मार्जिन ?

नई दिल्ली- हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इसबार भी उत्तर हरियाणा की करनाल विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 2014 में पूरे उत्तर हरियाणा में बीजेपी को बड़ी जीत मिली थी और पार्टी को सत्ता में पहुंचाने में इस क्षेत्र का बहुत बड़ा रोल था। इस इलाके में पंजाबी बोलने वाले बनिया समाज का खासा दबदबा है और खुद मुख्यमंत्री खट्टर भी पंजाबी खत्री परिवार से आते है। इस इलाके में खट्टर की लोकप्रियता पिछले पांच साल में और बढ़ी है और आजकल वहां एक चुनावी नारा खूब चल रहा है, जो युवाओं में खूब लोकप्रिय हो रहा है- 'मैं भी मनोहर'। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी को लगता है कि खट्टर की शख्सियत के मुताबिक ही उनकी जीत का मार्जिन भी बड़ा होना चाहिए और पार्टी के रणनीतिकार उसी आधार पर चुनावी जोड़-घटाव में लगे हुए हैं। बीजेपी मानकर चल रही है कि इसबार खट्टर की जीत का अंतर एक लाख से भी ज्यादा वोटों का रहने वाला है।

एक लाख से ज्यादा वोटों से जीते के दावे

एक लाख से ज्यादा वोटों से जीते के दावे

करनाल विधानसभा सीट से 2014 में मनोहर लाल खट्टर 64,000 वोटों से जीते थे। तब उन्होंने पूर्व कांग्रेस नेता और करनाल से दो बार के विधायक जय प्रकाश गुप्ता को हराया था, जो निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में थे। इन पांच सालों में एक बड़ा परिवर्तन ये हुआ है कि जय प्रकाश गुप्ता इसी साल भाजपा में शामिल हो चुके हैं और वे ही इस सीट पर मुख्यमंत्री का चुनाव अभियान संभालने में पूरी तरह से जुटे हुए हैं। ऐसे में भाजपा मानकर चल रही है कि इस चुनाव में खट्टर 1,00,000 से भी ज्यादा वोटों से जीतेंगे। बीजेपी के इस दावे के पीछे बड़ी वजह ये भी है कि विपक्ष ने यहां एक तरह से हथियार डाल दिए हैं। इंडियन नेशनल लोकदल (आईएनएलडी) ने यहां अपना उम्मीदवार भी नहीं उतारा है। खुद गुप्ता ने ईटी को बताया भी है कि 'हमारे हिसाब से अगर 70 फीसदी से ज्यादा पोलिंग होती है और 1.5 लाख से ज्यादा वोट पड़ते हैं, तब 1.2 लाख से ज्यादा वोट मुख्यमंत्री को मिलेंगे और बाकी सभी पार्टियां 25,000 से ज्यादा वोट हासिल करने में नाकाम रहेंगी।'

सीएम खट्टर के मुकाबले में कौन ?

सीएम खट्टर के मुकाबले में कौन ?

आईएनएलडी ने करनाल में खट्टर के खिलाफ उम्मीदवार नहीं दिया है, लेकिन उससे टूटकर बनी जननायक जनता पार्टी ने बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव को टिकट दिया है। यादव वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ भी चुनाव लड़ने गए थे, लेकिन तब उनका नामांकन रद्द हो गया था। खट्टर पंजाबी खत्री हैं, इसी को ध्यान में रखकर कांग्रेस ने अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष त्रिलोचन सिंह को यहां से टिकट दिया है, क्योंकि वे भी पंजाबी हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि पंजाबी होने के नाते सिंह, खट्टर के लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं। हालांकि, इस चक्कर में कांग्रेस को अपने दो बार की विधायक सुमीता सिह का टिकट काटना पड़ा है। गुप्ता के मुताबिक न तो यादव और न ही सिंह खट्टर के मुकाबले में कहीं भी टिक पाएंगे- 'इनमें से किसी को भी 4,000-5,000 से ज्यादा वोट नहीं मिलेंगे।' उनके अनुसार करनाल में सीएम की लोकप्रियता बहुत ही ज्यादा है और यहां का राजनीतिक मूड पूरी तरह से एकतरफा नजर आ रहा है।

'मैं भी मनोहर' कैंपेन

'मैं भी मनोहर' कैंपेन

लोकसभा चुनाव में 'मैं भी चौकीदार' कैंपेन ने बीजेपी के फेवर में बढ़िया माहौल बना दिया था। इसी तर्ज पर हरियाणा भी पार्टी के युवा कार्यकर्ता मुख्यमंत्री खट्टर की तस्वीर के साथ 'मैं भी मनोहर' के नारे लगाते देखे जा रहे हैं और करनाल में तो इसकी खूब भरमार है। खुद खट्टर अपने चुनाव चुनाव क्षेत्र में ज्यादा प्रचार भी नहीं कर रहे हैं और वे सिर्फ नामांकन दर्ज करने आए थे और सोमवार को दशहरा पर आयोजित एक समारोह में शिरकत कर गए थे। बीजेपी के लोगों का मानना है कि सोनीपत से लेकर पानीपत और करनाल से लेकर कुरुक्षेत्र तक जो मतदाताओं का मूड है, वह करनाल में ज्यादा खिल कर दिख रहा है। गौरतलब है कि इस इलाके में पिछले चुनाव में बीजेपी को भारी बढ़त मिली थी।

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