कैसे हरियाणा ने महाराष्ट्र से झारखंड तक बदल दिया समीकरण? कांग्रेस को भारी पड़ सकती है हार

Haryana Result in Hindi: हरियाणा में कांग्रेस की लगातार तीसरी हार ने महाराष्ट्र और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उसकी मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। 2014 से 2024 तक कांग्रेस यहां तीनों विधानसभा चुनाव बीजेपी के हाथों हारी है। इससे उसे लोकसभा चुनावों में इस बार जो बढ़त मिली थी और वह सहयोगियों पर दबदबा बढ़ाने की कोशिश में थी, उसमें बड़ा झटका लग सकता है।

दूसरी तरफ महाराष्ट्र में बीजेपी को लोकसभा चुनावों में जो झटका लगा था और महायुति में उसकी सहयोगी पार्टियां ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का दबाव बनाए हुई थी, उससे बीजेपी को राहत मिल सकती है। कुछ राजनीतिक जानकारों ने यह अनुमान जाहिर किया है।

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हरियाणा में हार कांग्रेस पर महाराष्ट्र में पड़ सकती है भारी
इस साल लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा सीटें जीती थीं। वह अभी तक सीटों के तालमेल को लेकर हो रही बातचीत में ड्राइविंग सीट पर नजर आ रही थी। लेकिन, हरियाणा में पार्टी की हुई हार ने उसके हालात बदल दिए हैं। भाजपा का मनोबल इसलिए और ऊंचा है, क्योंकि जम्मू कश्मीर में वह भले ही नहीं जीत सकी है, लेकिन उसकी सीटें भी बढ़ी हैं और वह सबसे ज्यादा वोट पाने में भी सफल रही है।

बीजेपी और कांग्रेस के बदल गए हालात
न्यूज एजेंसी पीटीआई से राजनीतिक विश्लेषक अभय देशपांडे ने कहा है, 'सीटों पर बातचीत के दौरान (महायुति में) शुरू में बीजेपी लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन की वजह से बैकफुट पर नजर आ रही थी।' लेकिन, हरियाणा में बड़ी जीत ने यह संदेश दे दिया है कि भाजपा अपने तेवर में वापस आ चुकी है।

वहीं उन्होंने आगे कहा है, 'दूसरी तरफ कांग्रेस को एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (यूबीटी) के साथ (एमवीए) चर्चा में अब टोन हल्का करना पड़ जाएगा।' हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण हरियाणा से अलग हैं।

एमवीए को कांग्रेस से सबक सीखने की जरूरत- राजनीति के जानकार
वहीं राजनीति के जानकार प्रकाश अकोलकर का कहना है कि विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) को कांग्रेस से बहुत ज्यादा सबक सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'लोकसभा चुनावों में इसके प्रदर्शन के बाद कांग्रेस काफी उत्साहित थी और कोंकण जैसे क्षेत्र में भी सीटों पर दावे करने लगी थी, जहां उसकी मौजूदगी नहीं के बराबर है।'

उनका कहना है कि 'कांग्रेस को समझना चाहिए कि जनादेश चार महीनों के अंदर ही बदल सकता है। सीटों के बंटवारे के दौरान इसे बेवजह के दावे नहीं करनी चाहिए।' उन्होंने हरियाणा में कांग्रेस की हार की एक बड़ी वजह उसकी गुटबाजी को बताया है और महाराष्ट्र में भी समय रहते इसपर लगाम लगाने की ओर इशारा किया है।

'विभाजनकारी हथकंडों' को नाकाम करेंगे- शिवसेना
उनका कहना है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी को लोगों के सामने कुछ नया लेकर आना चाहिए, न कि सिर्फ 'गद्दार' और 'विश्वासघात' वाले आरोपों से काम चलने वाला है। हरियाणा चुनाव के बारे में शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा है कि हरियाणा की तरह ही महाराष्ट्र के वोटर भी 'विभाजनकारी हथकंडों' को नाकाम कर देंगे और डबल-इंजन सरकार में हो रही प्रगति के साथ चलेंगे।

'कांग्रेस हतोत्साहित नहीं हुई है'
वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने दावा किया है कि हरियाणा के नतीजे का महाराष्ट्र में उनके कार्यकर्ताओं के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'महा विकास अघाड़ी मिलकर एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार को हराएगी और कांग्रेस हरियाणा के चुनावी ट्रेंड से हतोत्साहित नहीं हुई है।'

लेकिन, कांग्रेस की चुनौती सिर्फ महाराष्ट्र में बढ़ने की ही आशंका नहीं है। इसके साथ झारखंड विधानसभा के भी चुनाव होने हैं, जहां वह जेएमएम की अगुवाई वाली सरकार का हिस्सा है। राज्य में सत्ताधारी गठबंधन पहले से ही पांच साल की एंटी-इंकंबेंसी और भ्रष्टाचार के आरोपों को झेल रही है।

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वहां लोकसभा चुनावों में भी गठबंधन का खराब प्रदर्शन हुआ था। हरियाणा के रिजल्ट आने के बाद कांग्रेस के यहां भी ज्यादा दबाव में आन की आशंका बढ़ गई है और झारखंड मुक्ति मोर्चा के मुकाबले उसे कुछ सीटों पर समझौते के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है।

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