Haryana Election: हरियाणा में BJP किस तरह से पार करना चाहती है जादुई आंकड़ा? सामने आई ये रणनीति

Haryana Vidhan Sabha Chunav: इस बार लोकसभा चुनावों में भाजपा की सीटें कम हुई हैं तो उसने अपनी रणनीतियों में भी काफी बदलाव किया है। इसके तहत हो सकता है कि हरियाणा में पार्टी कई सीटिंग विधायकों और मंत्रियों का टिकट काट दे और नए चेहरों और सक्रिय कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताए।

लोकसभा चुनावों में इस बार हरियाणा में बीजेपी 10 में से सिर्फ 5 सीटें ही जीती है। हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों के हिसाब से देखा जाए तो पार्टी को इनमें से सिर्फ 44 सीटों पर ही बढ़त मिली है। यानी 46 सीटों पर वह कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक से पिछड़ गई है। बीजेपी ने अभी से इन 46 सीटों पर हार को जीत में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है।

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हरियाणा की हारी हुई 46 सीटों के लिए खास रणनीति
मतलब, बढ़त वाली 44 सीटों के साथ-साथ पार्टी हारी हुई 46 सीटों पर ज्यादा जोर लगाने जा रही है। पिछले दिनों दिल्ली में हरियाणा बीजेपी कोर ग्रुप की मैराथन बैठकें प्रदेश के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कैंप ऑफिस में चली हैं। यहां विधानसभा के साथ-साथ राज्य की खाली हुई राज्यसभा की एक सीट पर चुनाव को लेकर भी रणनीतियां बनाई गई हैं।

मौजूदा विधायकों की परफॉर्मेंस भी रखेगी मायने
इस बैठक में भाजपा कोर ग्रुप ने विधानसभा में पिछड़ने वाली 46 सीटों पर किस तरह से काम किया जाए, इसपर तो फोकस किया ही है, पिछले पांच वर्षों में सीटिंग विधायकों और मंत्रियों की परफॉर्मेंस कैसी रही है, क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता की स्थिति आज कैसी है? इन विषयों पर भी गंभीरता से सोचा गया है।

लोकसभा चुनावों वाली गलतियों से परहेज!
माना जा रहा है कि पार्टी बीते पांच वर्षों में जिला और विधानसभा स्तर पर सक्रिय रहे वैकल्पिक नेताओं की उम्मीदवारी पर भी पार्टी विचार कर सकती है। लोकसभा चुनावों में पूरे देश में भाजपा के अंदर से इस तरह की आम शिकायतें मिली हैं कि कई क्षेत्रों में पार्टी सिर्फ इसलिए हारी, क्योंकि मतदाताओं में मौजूदा सांसदों से काफी नाराजगी थी और उन्हें लगा कि केंद्र में मोदी सरकार तो बन ही रही है, एक उम्मीदवार के हारने से क्या फर्क पड़ने वाला?

चुनावों की घोषणा से पहले ही चुनावी अभियान में आएगी बीजेपी
जानकारी के मुताबिक बीजेपी ने विधानसभा चुनावों से पहले ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के लिए की रैलियों की भी तैयारियों में शुरू कर दी हैं। शाह तो लोकसभा चुनावों के बाद प्रदेश में दो सभाएं कर भी चुके हैं।

मुख्यमंत्री राज्य विधानसभा के चुनाव अभियान की शुरुआत कुरुक्षेत्र से 4 अगस्त से ही करने वाले हैं। कोशिश है कि प्रदेश की सभी 90 विधानसभा सीटों पर ऐसे ही आयोजन पूरे किए जाएं। माना जा रहा है कि बीजेपी इस चुनाव में सीएम सैनी को ही मुख्य चेहरे के तौर पर पेश करेगी।

भाजपा को सीएम सैनी के नेतृत्व पर है भरोसा
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लग रहा है कि मुख्यमंत्री सैनी ने 10 साल की एंटी-इंकंबेंसी को कुछ महीनों में ही अच्छे से कंट्रोल किया है और मनोहर लाल खट्टर के बाद सीएम के तौर पर धीरे-धीरे अपनी स्वीकार्यता साबित की है।

कोर वोटरों को लामबंद करने लगी है भाजपा
जानकारी के अनुसार बीजेपी ने इस बार हरियाणा में सोशल मीडिया पर और जमीनी स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों की फौज उतारने की तैयारी की है। पार्टी की रणनीति खासकर पिछड़े समुदाय को लेकर है और यह अपने कोर वोट बैंक जैसे कि बनिया, ऊंची जातियों के अलावा गैर-जाट ओबीसी वोटरों को लामबंद करने पर जोर दे रही है।

कोर वोटरों तक पहुंचने में भाजपा को आरएसएस के स्वयंसेवकों का सहयोग मिलने की भी पूरी उम्मीद है और उसकी कोशिश है कि अगर एक बार कोर वोटरों के बीच ठीक से काम हो गया तो फिर वह तीसरी बार भी निश्चित तौर पर हरियाणा में सरकार बना सकती है।

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