Harveen Kahlon : शौर्य की जीवित कहानी, सेना में मेजर पति की शहादत से मिली प्रेरणा, खुद लेफ्टिनेंट बनीं, VIDEO
Harveen Kahlon महज एक नाम नहीं देशप्रेम की मिसाल और भारतीय नारी के शौर्य का जिंदा बखान हैं। Harveen Kahlon Maj KPS Kahlon OTA Chennai Indian army commission
Harveen Kahlon महज एक नाम नहीं, किवदंती की दिशा में बढ़ा पहला कदम है। शहीद मेजर की पत्नी हरवीन काहलों ने जब सैन्य अधिकारी के रूप में 11 महीनों का कठिन प्रशिक्षण पूरा किया तो उनकी आंखों की चमक देखते ही बन रही थी। अपने नौनिहाल के साथ चेन्नई के ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में लेफ्टिनेंट बनने के बाद काहलों ने कहा, उनके शहीद पति जहां कहीं भी होंगे, उन्हें निश्चित ही गर्व हो रहा होगा।

वीरांगना हरवीन काहलों की कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि परंपरागत रूप से सेना और शौर्य पुरुष प्रधान समझा गया लेकिन हरवीन ने दृढ़ संकल्प से साबित किया कि वे सही मायने में वीर नारी हैं। सेना की ट्रेनिंग कमांड के ट्विटर पर भी Harveen Kahlon के लिए हैशटैग #VeerNari लिखा जाना इसका प्रमाण है। पति-पत्नी की अद्वितीय शौर्यगाथा डॉ कुमार विश्वास की पंक्तियों को भी चरितार्थ करती है जिसमें उन्होंने लिखा;
है नमन उनको कि जो देह को अमरत्व देकर
इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं
है नमन उनको कि जिनके सामने बौना हिमालय
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये हैं
पिता जिनके रक्त ने उज्जवल किया कुलवंश माथा
मां वही जो दूध से इस देश की रज तौल आई
कमीशन मिलने के बाद लेफ्टिनेंट हरवीन काहलों ने कहा, उनके लिए देश सबसे पहले है। बेटे की रगों में सैनिक पिता और मां का खून दौड़ रहा है। ऐसे में मातृभूमि और खुद एक मां के रूप में उनके सामने कोई दुविधा नहीं होगी। देश सबसे पहले होगा।

वीरांगना हरवीन काहलों ने चुना अग्निपथ
ये कहानी किसी महिला सैन्य अधिकारी के लेफ्टिनेंट बनने भर की नहीं है। ये कहानी अपना सबकुछ लुटाने वाली प्रिया की है, जिसने पति के सर्वोच्च बलिदान से प्रेरणा ली। कहानी उस वीर प्रसूता की है जिसने प्रियतम के जाने के बाद भी हौसला नहीं खोया। सेना के खतरों से वाकिफ होने के बावजूद वीरांगना हरवीन काहलों ने भी उसी अग्निपथ को अपना भविष्य बनाने की ठानी जिस पर चलकर देशप्रेमी पति चिर निद्रा में सो गए।

पति की बहादुरी से मिली प्रेरणा
चेन्नई के Officers Training Academy में 11 महीनों की कठिन ट्रेनिंह पूरी करने के बाद Cadet Harveen Kahlon को कमीशन मिला। भारतीय सेना में अधिकारी बनीं हरवीन अब लेफ्टिनेंट हरवीन काहलों के नाम से जानी जाएंगी। हरवीन बताती हैं कि 2019 में देश के लिए बलिदान देने वाले पति से प्रेरणा पाकर उन्होंने भी सेना में शामिल होने का फैसला लिया।

शौर्य की जीवित कहानी
Indian Army Maj KPS Kahlon सेना की 129वीं साटा रेजिमेंट में आर्टिलरी ऑफिसर थे। देश पर मर मिटने वाले मेजर केपीएस काहलों के जीवन पर कवि कुमार विश्वास की ये पंक्तियां सटीक हैं, जिसमें डॉ विश्वास ने एक शहीद का शब्द चित्र बनाया है। कुमार विश्वास लिखते हैं
है नमन उनको कि जो देह को अमरत्व देकर
इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं
इसी रचना में कुमार विश्वास लिखते हैं;
बेटियां जो लोरियों में भी प्रभाती सुन रहीं थीं
पिता तुम पर गर्व है चुपचाप जाकर बोल आये
अपने पिता को न देख सकने वाला नौनिहाल सपूत जब आने वाले समय में मेजर केपीएस काहलों की शौर्यगाथा सुनेगा तो इसमें कोई शक नहीं कि उसका सीना भी गर्व से चौड़ा हो जाएगा।

सिन्दूरदानों की व्यथाओं... केपीएस काहलों को गर्व होगा
कोर्स पूरा करने के बाद Harveen Kahlon ने कहा, उन्हें खुद पर गर्व है। उन्हें पता है कि मेजर केपीएस काहलों जहां कहीं भी हैं, वे उन्हें गर्व से देख रहे हैं। हरवीन की भावनाओं को देखकर इस मौजूं पर भी कुमार विश्वास की कविता की कुछ पंक्तियां सटीक हैं-
लिख चुकी है विधि तुम्हारी वीरता के पुण्य लेखे
विजय के उदघोष, गीता के कथन तुमको नमन है
राखियों की प्रतीक्षा, सिन्दूरदानों की व्यथाओं
देशहित प्रतिबद्ध यौवन के सपन तुमको नमन है
इन पंक्तियों में कुमार विश्वास ने सुहागन और प्रेमिका के भावों का चित्रण किया है। OTA Chennai की यात्रा को उन्होंने यादगार करार दिया। एक मां के रूप में सैन्य अधिकारी बनने वाली हरवीन काहलों ने कहा, जब उनके तन पर वर्दी होगी, देश सबसे पहले होगा।

बेटे की रगों में सैन्य अधिकारी का खून
लाडले को गोद में उठाए हरवीन काहलों से जब बेटे के भविष्य के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ किया कि अभी ये सवाल करना जल्दबाजी है। उन्होंने बताया कि जब वे गर्भवती थीं उसी अवधि में मेजर केपीएस काहलों शहीद हुए थे, ऐसे में उनका बेटा अपने पिता को नहीं देख सका।
नीचे देखें हरवीन काहलों की वीडियो--
मां को देखकर पिता का एहसास
सेना के शौर्य की परंपरा का निर्वाह करने को प्रतिबद्ध हरवीन काहलों बताती हैं कि आने वाले दिनों में बेटो को अपने पिता (मेजर केपीएस काहलों) की ऐसी छवि याद रहेगी, जो वीरता की कहानी बयां करेगी। इसकी रगों में सैन्य अधिकारी का खून बहता है। मैं ऐसी मां बनना चाहती हूं कि बेटा अपनी मां को देखकर पिता का एहसास कर सके।












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