पढ़ने में फिसड़्डी ही था हार्दिक पटेल
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) हार्दिक पटेल ने सारे देश को अपनी ताकत दिखा दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य में उसने बड़ा आंदोलन चलाया। पर, अहमदाबाद के सहजानंद कालेज की डिग्री लेकर जब हार्दिक पटेल घर लौटा तो उसके हौसले पूरी तरह टूट चुके थे।
मार्कशीट में 40 परसेंट से भी कम नंबर थे। कहते हैं कि वह बेहद एवरेज स्टुडेंट था अपने छात्र जीवन में। थक हारकर पिता की छोटी सी फैक्ट्री में हार्दिक को काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकिन सपने बड़े हों तो छोटे से लघु उद्योग में मन कहाँ लगेगा।
जुड़ा बीजेपी से
हार्दिक ने बीजेपी के लिए काम शुरू किया पर भगवा भीड़ में वो गुम होने लगे। उसने फिर विश्व हिन्दू परिषद्के नेता प्रवीण तोगड़िया का दामन थामा। यहाँ भी बात ना बनी तो लोक सभा चुनाव के वक़्त हार्दिक अरविन्द केजरीवाल के साथ चला गया। पर कामयाबी हार्दिक से अभी कोसो दूर थी। फिर अचानक बीजेपी के दो पटेल नेता जिसमे एक पूर्वमंत्री भी थे हार्दिक से मिले और बात बनने लगी।
जाति का कार्ड
हार्दिक ने जब जाति का कार्ड चला तो शुरू में उनके सपनो को पंख नही मिले लेकिन जैसे ही कांग्रेस के कुछ पैसे वाले नेता बेक डोर से हार्दिक के पीछे खड़े हुए तो गेम बदलने लगा।
केवल 22 साल की उम्र में गुजरात सरकार की नींद उड़ा देने वाले हार्दिक पटेल को दो महीने पहले तक कोई नहीं जानता था, लेकिन आज देश की गली गली और सोशल मीडिया पर उनकी ख़ासी चर्चा है। बीते हफ्ते अहमदाबाद में पाटीदार समाज की महारैली में लाखों की संख्या में लोग पहुंचे।
पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के नेतृत्व में आयोजित इस महारैली में लाखों पाटीदार समाज के लोग इकट्ठे हुए। यह समाज राज्य सरकार से 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग कर रहा है।
जानकार कह रहे हैं कि हार्दिक में अखिल भारतीय स्तर पर अपनी ताकत दिखाने के गुण हैं। कायदे से उन्हें सभी दलों को गंभीरता से लेना चाहिए। पर, वह सरदार पटेल बनने लायक भी नहीं लगता।













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