कौन हैं हरदयाल सिंह, जिन्होंने लगाए 10000 पेड़, उन्हीं की कोविड के चलते दम घुटने से हुई मौत
पटियाला, 10 जून। देश कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से उबरने की कोशिश कर रहा है, कई राज्यों के दैनिक मामलों में भारी कमी भी आई है। इस बीच अब तक 4 लाख से अधिक लोग देश में जानलेवा महामारी से दम तोड़ चुके हैं। कोरोना ने सिर्फ हमसे आम जिंदगियां नहीं छिनी बल्कि महामारी ने हमसे कई ऐसी जिंदगियां छीन लीं जो अपना पूरा जीवन दूसरों की भलाई के लिए ही समर्पित कर दिया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि अपने जीवनकाल में 10 हजार से अधिक पेड़ लगाने वाले हरदयाल सिंह की कोविड के चलते दम घुटने से मौत हो गई।

कौन हैं हरदयाल सिंह?
इस खबर ने जरूर आपको हैरान-परेशान किया होगा लेकिन हममें से कई ऐसे लोग भी हैं जो हरदयाल सिंह के बारे में बहुत कम जानते हैं। हमेशा कीचड़ से सने हाथों के साथ नजर आने वाले हरदयाल सिंह को उनके द्वारा लगाए गए 10 हजार से अधिक पेड़ों के लिए याद किया जाएघा। 67 वर्षीय हरदयाल सिंह पिछले 12 वर्षों से रोजाना पौधारोपण कर रहे हैं। हर सुबह वह अपने गांव के श्मशान घाट की सीमा तक पैदल चलने से पहले रोजाना अपनी साइकिल पर पौधे और मिट्टी लाद देते थे।

10,000 से अधिक पेड़ लगाए
दिप्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक हरदयाल सिंह ने बीते 12 सालों में पंजाब के पटियाला जिले के ढाबलन गांव में 10,000 से अधिक पेड़ लगाए और उनका पालन-पोषण किया। उनकी 54 वर्षीय पत्नी कुलविंदर कौर ने बताया कि इलाके में ऑक्सीनज की मात्रा को बढ़ाने और गांव में सांस लेने लायक हवा बनाने में उनका यह छोटा सा योगदान था। हालांकि अब पिछले महीने की 25 तारीख से कोई भी गांव में नया पेड़ नहीं लगा है। लेकिन ऐसा क्यों हैं?

गांव से दो घंटे की दूरी पर था अस्पताल
कुलविंदर कौर ने बताया कि 25 मई को हरदयाल सिंह की कोरोना वायरस के चलते मौत हो गई थी। सिंह को सांस लेने में तकलीफ के बाद पहले बेड खोजने में परेशानी आई और बेड मिलने के कुछ दिनों के भीतर उनका निधन हो गया। हरदयाल सिंह की पत्नी के मुताबिक वह 17 को कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आए थे, उस सयम तक उन्हें सांस लेने संबंधी कोई दिक्कत नहीं थी। 18 मई को ग्रामीणों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जद्दोजहद की लेकिन ऑक्सीजन बिस्तर खोजने में लगभग 28 घंटे लग गए।

ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत
कुलविंदर कौर ने बताया कि अस्पताल भी गांव से लगभग दो घंटे की दूरी पर चंडीगढ़ में था। गांव के सरपंच करण वीर सिंह के अनुसार हरदयाल को 19 मई की देर रात चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी हालत खराब थी और उनका ऑक्सीजन लेवल बहुत कम था। सेहत में सुधार ना होने की वजह से उन्हें 23 तारीख को वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, वह हमें छोड़कर जा चुके थे।

प्रदूषण ना हो, इसलिए नहीं खरीदी बाइक
25 मई, 2021 को हरदयाल सिंह का निधन हो गया। कुलविंदर कौर रोते हुए कहती हैं, 'जिस आदमी ने इतने पेड़ लगाए ताकि ऑक्सीजन बढ़ सके, हवा साफ कर सके, परमात्मा ने उसे ही ऑक्सीजन नहीं दी...किस्मत देखो। दम घुटने से उसकी मौत हो गई।' उन्होंने आगे कहा, 'जब हम उनसे (हरदयाल) को कम से कम एक बाइक लेने के लिए कहते तो वह कहा करते थे कि बाइक प्रदूषण का कारण बनती है और इसलिए वह साइकिल चलाना पसंद करता है।'

बना दिया छोटा सा जंगल
हरदयाल सिंह साल 2013 में पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन से स्टेनोग्राफर के रूप में रिटायर हुए थे और वह ग्रामीणों के बीच भी लोकप्रिय थे। उन्हें अक्सर हाथ में कीचड़ लपेटे ही देखा जाता था। वह ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना चाहते थे। सरपंच करण वीर सिंह ने कहा, हम या तो उन्हें कहीं पेड़ खोदते और लगाते या उसे पानी देते या पौधे को एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हुए देखा करते थे। उन्होंने श्मशान के बगल में एक छोटा जंगल बनाया, उन्होंने गांवों में भी हजारों पेड़ लगाए।

रेलवे के लिए नहीं कटने दिया पीपल का पेड़
करण वीर सिंह ने बताया, हरदयाल सिंह पहले सरकारी नर्सरी से पौधा प्राप्त करते फिर घर पर उसकी देखभाल और बड़ा करते। इसके बाद वह उसे जमीन पर लगाते थे। उन्होंने पर्यावरण को संरक्षित करने के बारे में बहुत गंभीरता से बात की। हमने हमेशा उसने हाथ कीचड़ में देखे हैं। कुछ साल पहले जब रेलवे विभाग को गांव से होकर गुजरने वाली रेलवे लाइन द्वारा एक पावर ग्रिड का निर्माण करना था, तो रास्ते में एक पीपल था जिसे अधिकारी काटकर बाड़ बनाने की फिराक में थे। पेड़ काटने का आदेश दिया गया लेकिन हरदयाल सिंह ने उनके खिलाफ लड़ाई लड़ी और जीत गए।
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