स्कूल के प्रिंसिपल से मिली IAF में जाने की प्रेरणा, UAE में राफेल लैंड कराने के बाद टीचर ने दी सबसे पहली बधाई
अंबाला। इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के लिए तैयार फ्रेंच फाइटर जेट राफेल की लैंडिंग आज अंबाला में हो गई। पांच राफेल जेट का पहला बैच बुधवार को हरियाणा के अंबाला एयरफोर्स स्टेशन फ्रांस और यूएई होता हुआ भारत पहुंच गया। जिन जेट्स की लैंडिंग हुई उनमें एक जेट पंजाब के मुक्तसर जिले के रहने वाले स्क्वाड्रन लीडर रंजीत सिंह सिद्धू का भी है। स्क्वाड्रन लीडर सिद्धू ने एक बार फिर अपने टीचर्स को मौका दिया है कि वो फिर से उन पर गर्व कर सकें। पांच राफेल के इस दल में ग्रुप कैप्टन हरकीरत सिंह, ग्रुप कैप्टन रोहित कटारिया, विंग कमांडर मनीष सिंह, विंग कमांडर अभिषेक त्रिपाठी, स्क्वाड्रन लीडर रंजीत सिंह सिद्धू और दीपक चौहान शामिल हैं।
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टीचर्स को आज भी याद हैं रंजीत
स्क्वाड्रन लीडर रंजीत सिंह सिद्धू पंजाब के मुक्तसर जिले के रहने वाले हैं। मुक्तसर के गिद्देरबाहा के रहने वाले स्क्वाड्रन लीडर को टीचर्स आज तक याद करते हैं। 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने गिद्देरबाहा के मालवा स्कूल से की थी। उनके टीचर्स का कहना है कि स्कूल के दिनों से ही उनमें लीडरशिप की खूबियां थीं। वह हर सबजेक्ट में काफी अच्छे नंबर लाते थे। उनके टीचर और मालवा स्कूल के वाइस प्रिंसिपल जसबीर सिंह बरार ने बताया, 'जब यूएई में वह था तो मेरी उससे बात हुई थी और मैंने उसे देश में यह एडवांस जेट लाने पर बधाई भी दी थी।' उनका कहना है कि यह निश्चित तौर पर एक बड़ी उपलब्धि है और पूरा देश जेट् की लैंडिंग देख रहा था।

फुटबॉल के चैंपियन
उनका कहना है कि अब स्क्वाड्रन लीडर रंजीत के बाद कई और लोग भी उनसे प्रेरणा लेंगे। वह पढ़ाई में जितने अच्छे थे खेल-कूद में भी उतना ही आगे रहते थे। स्पोर्ट्स में भी वह हमेशा एक टॉपर रहे। वाइस प्रिंसिपल बरार ने बताया कि बचपन ने ही स्क्वाड्रन लीडर रंजीत हर क्षेत्र में काफी एक्टिव रहते थे। वह स्कूल की फुटबॉल टीम के कैप्टन भी। उनकी कप्तानी ने स्कूल ने राज्य स्तर के टूर्नामेंट में जीत हासिल की थी। उनका कहना है कि जिस मुकाम पर आज रंजीत पहुंचे हैं, वहां तक हर कोई नहीं पहुंच पाता है। स्कूल की तरफ से अब स्क्वाड्रन लीडर रंजीत को सम्मानित करने की योजना बनाई है।

स्कूल के प्रिंसिपल से होते थे प्रेरित
स्क्वाड्रन लीडर सिंह जिस समय स्कूल में थे तो उनके प्रिंसिपल थे रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर वेणुगोपाल। यहीं से उन्हें वायुसेना में जाने की प्रेरणा मिली। स्क्वाड्रन लीडर सिंह अपने प्रिंसिपल से बहुत कुछ सीखते। सन् 1999 में 12 कक्षा पास की और साल 2000 में नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) की परीक्षा पास की। आज भी वह जब कभी गिद्देरबाहा आते हैं तो अपने स्कूल जाना नहीं भूलते हैं। रंजीत के पिता गुरमीत सिंह राजस्व विभाग से रिटायर हैं और अब गिद्देरबाहा में रहते हैं। लेकिन जिस समय उनका बेटा इतिहास रच रहा था वह कनाडा में थे। स्क्वाड्रन लीडर की बहन की शादी कनाडा में ही हुई है।

राफेल से पहले लेकर आए थे सुखोई
स्क्वाड्रन लीडर रंजीत के दोस्त रनबीर सिंह बरार कहते हैं कि रनबीर हमेशा से ही अनुशासन में रहने वाले इंसान हैं और हमेशा खुश रहते हैं। मालवा के स्कूल ट्रस्ट पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का परिवार चलाता है। पूर्व मुख्यमंत्री खुद इस ट्रस्ट के चेयरमैन है। रंजीत के चाचा की मानें तो वह राफेल से पहले साल 2003 में सुखोई को लेकर आए थे और अब वह फ्रांस से राफेल लेकर आए हैं। वह 10वीं कक्षा में थे और तब से ही इंडियन एयरफोर्स के लिए उनमें एक जुनून सा था। मूक्तसर जिले के रहने वालों की मानें तो जो इतिहास स्क्वाड्रन लीडर रंजीत ने रचा है वह हर किसी के लिए गौरवशाली पल है। हर किसी ने उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।












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