लाहौर में हाफिज सईद की रैली और घाटी में 'ब्लैक फ्राइडे'
श्रीनगर। घाटी में शुक्रवार की सुबह 3:15 मिनट पर बारामूला के उरी सेक्टर में मौजूद सेना के कैंप पर आतंकी हमला हुआ। सेना इस हमले से निपट रही थी कि सौरा में एक और आतंकी हमला हुआ।
जब तक इस हमले की खबर आती, शोपियां में पुलिस स्टेशन पर और पुलवामा के त्राल में ग्रेनेड अटैक की खबर आ गई। एक के बाद एक आतंकी हमलों ने घाटी के लिए शुक्रवार को 'ब्लैक फ्राइड' बना डाला।
लाहौर में कश्मीर की आजादी की बात
करीब एक माह पहले जब चार और पांच दिसंबर को लाहौर में लश्कर ए तैयबा के चीफ हाफिद सईद की एक धार्मिक रैली के आयोजन का ऐलान किया गया, उसी समय इस बात का इशारा मिल गया था कि जरूर आतंक का यह आका, घाटी के लिए अपनी साजिशों को अंजाम देगा।
पाक में सईद की रैली और घाटी में ब्लैक फ्राइडे
शुक्रवार को लाहौर में सईद ने कहा कि वह कभी एक हिंदुस्तान का सपना साकार नहीं होने देगा। इसके साथ ही उसने यहां पर कश्मीर की आजादी की बात कही। सईद ने रैली में कहा कि वह हर हाल में कश्मीर को आजाद करा कर रहेगा और साथ ही गुजरात दंगों में मारे गए मुसलमानों को इंसाफ भी दिलाएगा।
इसके साथ ही साथ उसने वर्ष 1971 में मिली हार का बदला लेने की बात भी दोहराई। जब हाफिज यह सारी बातें कर रहा था घाटी में हमारी सेना और सुरक्षाबल आतंकियों से मोर्चा ले रहे थे। इन हमलों में लश्कर के एक टॉप कमांडर को भी मार गिराया है।
चुनाव से बौखला गया हाफिज
घाटी में 25 नवंबर से विधानसभा चुनावों का आगाज हुआ है। पहले दौर में जहां 70 प्रतिशत मतदान हुआ तो दूसरे दौर में भी लोगों ने बिना किसी डर के वोट डाले और मतदान प्रतिशत 71 तक पहुंच गया।
जब पहले दौर का मतदान घाटी में पूरा हुआ तो उसके अगले दिन हिजबुल मुजाहिद्दीन की ओर से पोस्टर लगाए गए और लोगों को चुनावों से दूर रहने की धमकी दी गई। लेकिन लोगों ने डर को पीछे छोड़कर मतदान किया।
सूत्रों की मानें तो हाफिज सईद इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। साथ ही साथ आईएसआई को भी अब अपना एजेंडा फेल होता नजर आ रहा है। उन्हें डर है कि जिस कश्मीर के नाम पर वह अंतराष्ट्रीय मंच पर सहानुभूति बटोरते हैं, अगर वहां पर संवैधानिक तरीके से एक नई सरकार चुनकर आई तो फिर पाक के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
चुनावों से पहले भी हाफिज सईद की ओर से बयान दिया गया था जिसमें उसने विधानसभा चुनावों को लोगों पर जबर्दस्ती थोपा हुआ करार दिया था। वहीं हाफिज की इस बात को मजाक समझा जाए या भारत पर एक तंज कि जो हाफिज भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिशों में लगा है,
वही हाफिज पाक में आतंकवाद की कोई जगह नहीं है, ऐसी बातें करता है। साथ ही साथ पाक को एक आदर्श देश बनाने की बात कहकर एक ढोंग रचने का काम करता है।
कहां हैं नवाज शरीफ
लाहौर में आईएसआई के हेडक्वार्टर के पास ही सईद की बड़ी रैली हो रही है। सईद यहां पर एक इस्लामिक यूनाइटेड नेशन को बनाने की अपील करता है और पाक के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ खामोश रहते हैं।
साफ है कि नवाज सिर्फ और सिर्फ पाक का एक ऐसा चेहरा हैं जो दुनिया को तो यह बताता है कि पाक में लोकतंत्र है, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं है।काठमांडू में 18वें सार्क सम्मेलन और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में आतंकवाद से लड़ने के नवाज के सारे दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
सच्चाई यही है कि नवाज कभी भी आईएसआई और हाफिज सईद के खिलाफ कुछ नहीं कर सकते हैं। न सिर्फ नवाज बल्कि पाक का कोर्ट भी सईद के आगे लाचार है। तभी तो मुंबई आतंकी हमलों में उसे क्लीन चिट दे डाली गई।













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