ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CJI ने कोई आदेश देने से किया इनकार
नई दिल्ली, 13 मई: वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अंजुमन-ए-इंतेजामिया मस्जिद प्रबंधन कमेटी की ओर से दाखिल याचिका में ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे पर रोक लगाने की मांग की गई है। कमेटी ने अपनी याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। याचिकाकर्ता वकील ने ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के मामले में यथास्थिति बरकरार रखने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है। सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि बिना कागजात देखे आदेश जारी नहीं कर सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट मामले की जल्द सुनवाई करने को तैयार हो गया है।
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वाराणसी कोर्ट ने कमिश्नर अजय मिश्रा को हटाने से भी किया था इनकार
इससे पहले गुरुवार की दोपहर वाराणसी की कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद का सर्वे 17 मई तक पूरा करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही साफ कर दिया था कि ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे के लिए नियुक्त कमिश्नर अजय मिश्रा को नहीं बदला जाएगा। कोर्ट ने उनके अलावा विशाल सिंह और अजय प्रताप को भी दो सर्वे कमिश्नरों के रूप में जोड़ा है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि सर्वे जारी रहेगा और जरूरत पड़े तो वो मस्जिद के भीतर तक जा सकते हैं और वीडियोग्राफी भी कर सकते हैं। कोर्ट ने ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराने के लिए नियुक्त कोर्ट कमिश्नर को पक्षपात के आरोप में हटाने संबंधी याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि 17 मई तक सर्वे कमेटी रिपोर्ट दे।
असदुद्दीन ओवैसी ने क्या कहा ?
उधर, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ज्ञानवापी मस्जिद के फैसले को पूजा स्थल अधिनियम 1991 का "घोर उल्लंघन" करार दिया। ओवैसी ने कहा कि अधिनियम के अनुसार, "कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी भी वर्ग के पूजा स्थल को एक ही धार्मिक संप्रदाय के एक अलग वर्ग या एक अलग धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी भी वर्ग के पूजा स्थल में परिवर्तित नहीं कर सकता है।"












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