केरल के गुरुवायूर मंदिर में पीएम मोदी ने की विशेष पूजा, केवल हिंदुओं को ही है यहां प्रवेश की है इजाजत

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    Guruvayur Temple में PM Modi ने की Prayer, जानें Kerala का ये Temple क्यों है खास | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अपनी पहली यात्रा पर शनिवार को केरल पहुंचे हैं। पीएम मोदी केरल के त्रिशूर पहुंचे और यहां पर प्रसिद्ध गुरुवायूर मंदिर में विशेष पूजा की। पीएम मोदी को मंदिर में 112 किलो कमल के फूलों से तोला गया जिसे 'थुलाभारम रस्‍म' कहा जाता है। त्रिशूर में मंत्रोच्चार के साथ पूजा के बाद पीएम मोदी बीजेपी कार्यकर्ताओं को भी संबोधित करेंगे। पीएम मोदी ने ट्विटर पर एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें वे मंदिर की परिक्रमा करते दिखाई दे रहे हैं। गुरुवायूर मंदिर काफी पुराना है और इस मंदिर के गर्भगृह में श्रीकृष्ण की मूर्ति है। इस मंदिर में केवल हिंदू धर्म के लोगों को ही प्रवेश की इजाजत है। आइए, जानते हैं कि इस मंदिर की क्या खासियत है।

    इस मंदिर को दक्षिण भारत का द्वारका भी कहते हैं

    इस मंदिर को दक्षिण भारत का द्वारका भी कहते हैं

    केरल के इस मंदिर को दक्षिण भारत का द्वारका भी कहते हैं। इस मंदिर में भगवान गुरवायुरुप्पन की पूजा होती है जिनको भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। इस मंदिर को श्रीकृष्ण मंदिर भी कहते हैं। गुरुवायूर मंदिर देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में एक है और इस मंदिर का इतिहास करीब 5000 साल पुराना है। बताया जाता है कि 1638 में मंदिर के कुछ भागों का पुनर्निमाण किया गया था।

    मंदिर में रहने वाले पुजारी को कहते हैं मेंसाती

    इस मंदिर में रहने वाले पुजारी को मेंसाती कहते हैं जो 24 घंटे भगवान की सेवा में लीन रहते हैं। इस मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खास ड्रेस कोड भी है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को मुंडु नाम की पोशाक पहननी होती है जबकि बच्चों के लिए वेष्टी पहनाई जाती है। इसके अलावा औरतों को केवल सूट-सलवार या साड़ी में ही एंट्री मिल सकती है। खास बात है ये है कि इस मंदिर में केवल हिंदू धर्म के लोगों को ही प्रवेश की इजाजत है। दूसरे धर्म के किसी व्यक्ति के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश वर्जित है।

    केवल हिंदुओं को प्रवेश की इजाजत

    केवल हिंदुओं को प्रवेश की इजाजत

    गुरुवायूर मंदिर में भगवान कृष्ण की मूर्ति यहां के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान कृष्ण की मूर्ति के चार हाथ हैं। भगवान के एक हाथ में शंख और दूसरे में सुदर्शन चक्र है जबकि भगवान ने तीसरे और चौथे में कमल धारण कर रखा है। इस मंदिर में भगवान के दर्शन करने के बाद श्रद्धालुओं को अनाकोट्टा नामक स्थान पर जाना होता है।

    5000 साल पुराना है मंदिर का इतिहास

    5000 साल पुराना है मंदिर का इतिहास

    ये जगह हाथियों के लिए काफी लोकप्रिय है। इस मंदिर से जुड़े हाथियों को यहां 10 एकड़ जगह में रखा जाता है, करीब 80 हाथियों के रहने की व्यवस्था यहां पर की गई है। पीएम मोदी के कार्यक्रम को देखते हुए आम लोगों के लिए शनिवार को मंदिर का द्वार सुबह 9 बजे से 11 बजे तक बंद रखा गया। मंदिर में पूजा करने के बाद पीएम मोदी बीजेपी की ओर से आयोजित 'अभिनव सभा' को संबोधित करेंगे।

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