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गुजरात दंगा: PM मोदी को बड़ी राहत, तालुका कोर्ट ने तीन मामलों से नाम हटाया

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नई दिल्ली। गुजरात के साबरकांठी की तालुका अदालत ने गुजरात दंगा पीड़ितों से जुड़े तीन दीवानी मामलों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम हटा दिया। ये दीवानी मामले 2002 में हुए गुजरात दंगा पीड़ितों के रिश्तेदारों ने दायर किए थे। कोर्ट ने कहा कि वादी ऐसी कोई सामग्री नहीं पेश कर पाए जो यह स्थापित करती हो कि तत्कालीन मुख्यमंत्री घटना की जगह पर मौजूद थे। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक अदालत ने ये आदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वकील के आवेदन के बाद दिया।

मुख्य वरिष्ठ दीवानी जज एसके गढ़वी ने प्रधानमंत्री का नाम इस आधार पर हटा दिया कि वादी तीन मामलों में प्रधानमंत्री का नाम घसीटने की कोशिश कर रहे थे। दरअसल वादी ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ सामान्य, गैर विशिष्ट और भ्रामक आरोपों पर विश्वास किया और इस तरह का कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं कर पाए कि उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री घटनास्थल पर मौजूद थे।

22 करोड़ मांगा गया था मुआवजा

22 करोड़ मांगा गया था मुआवजा

ये दीवानी मामले मुआवजे के लिए डाले गए थे जिन्हें पीड़ितों के परिजन शिरीन दाऊद, शमीमा दाऊद (दोनों ब्रिटिश नागरिक) और इमरान सलीम दाऊद ने दायर किया था। मामले में मोदी समेत अन्य प्रतिवादियों पर कर्तव्य का निर्वहन करने का आरोप लगाया गया था और 22 करोड़ रुपये जुर्माने की मांग की गई थी।

मोदी के अलावा जो अन्य नाम मुआवजे में बचाव पक्ष की ओर से जवाब देने के लिए शामिल किए गए थे, उनमें वे छह आरोपी भी हैं जिन्हें विशेष अदालत से रिहा किया जा चुका है। इनमें गुजरात के पूर्व गृह मंत्री गोवर्धन जदाफिया, दिवंगत डीजीपी के चक्रवर्ती, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह अशोक नारायण, दिवंगत आईपीएस अमिताभ पाठक, उस समय इंस्पेक्टर डीके वणिक्कर और राज्य सरकार शामिल हैं।

क्या था मामला ?

क्या था मामला ?

28 फरवरी 2002 को ब्रिटिश नागरिक इमरान दाऊद जो कि उस समय 18 साल के थे, अपने अंकल सईद दाऊद, शकील दाऊद और मोहम्मद असवत के साथ अपनी पहली भारत यात्रा पर आए थे। चारों जयपुर और आगरा का दौरा कर साबरकांठा जिले के अपने पैतृक गांव प्रांतिज लौट रहे थे जहां दंगाई भीड़ ने उनका रास्ता रोक लिया और उनकी गाड़ी में आग लगा दी। सईद, असवत और गुजराती ड्राइवर की हमले में हत्या कर दी गई जबकि शकील लापता हो गए। ये माना गया कि उनकी भी मृत्यु हो गई।

विदेशी नागरिकों की हत्या के अलावा ये मामला इसलिए भी सुर्खियों में रहा था क्योंकि इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विदेशी राजनयिकों ने गवाही दी थी।

अदालत को नहीं मिला मामले में कोई साक्ष्य

अदालत को नहीं मिला मामले में कोई साक्ष्य

5 सितम्बर को दिए गए अपने आदेश में तालुका अदालत ने कहा कि ऐसा एक भी साक्ष्य नहीं है जो ये बताता हो कि अपराध के दौरान प्रतिवादी नंबर 1 (मोदी) घटना की जगह पर उपस्थित रहे हों या फिर घटना में उनकी कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष उपस्थिति दिखाता हो। न ही कोई विशिष्ट भूमिका पाई गई जिसमें द्वेष या दुर्भावना के आधार पर काम किए जाने का आधार पाया गया जिसके आधार पर वादी को किसी भी राहत का दावा करने के योग्य पा जा सकता है।'

अदालत ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि पीड़ितों के रिश्तेदारों ने ये नहीं बताया कि कैसे तत्कालीन राज्य सरकार के मुखिया मोदी राज्य सरकार के अधिकारियों के कृत्य का चूक के लिए कैसे उत्तरदायी हैं। आगे आदेश में अदालत ने कहा कि वादी ने बड़ी चतुराई से गोधरा के पूर्व और बाद के सभी केस में प्रतिवादी नंबर 1 नरेंद्र मोदी को साजिशकर्ता के रूप में पेश किया है जो उन्हें मुआवजे के लिए उत्तरदायी बनाता है। जज ने कहा कि मेरे विचार में ऐसे लापरवाह आरोप जो बिना आधार और साक्ष्य के लगाए गए हैं शायद ही मोदी के खिलाफ कोई कार्रवाई करने में मदद कर सकते हैं।

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English summary
gujrat taluka court remove pm narendra modi name from three suits
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