मतगणना में ईवीएम पर सवाल, कांग्रेस खेमे में हिलता दिखा विश्वास
नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले सबसे अजीब बात अगर कुछ रही तो कांग्रेस की ओर से जीत के दावे के साथ-साथ ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका। ईवीएम पर अविश्वास एक ऐसे समय पर सामने आया जब पंजाब में स्थानीय निकाय के चुनावों में कांग्रेस को बड़ी सफलता मिली है। ऐसे में गुजरात के संदर्भ में ईवीएम को लेकर कांग्रेस के दावे पर सवाल उठना और लोकतांत्रिक हलके में आश्चर्य जताया जाना लाजिमी है।

हार्दिक-जिग्नेश को चाहिए दोनों हाथों में लड्डू
चाहे जिग्नेश हों या हार्दिक पटेल इन दोनों नेताओं ने परिवर्तन की लहर का दावा करते हुए भी ईवीएम के जरिए हेरफेर की आशंका जतायी। ऐसा लगा मानो वे दोनों हाथों में लड्डू लेकर चलना चाहते हों। जीत गये तो खाएंगे लड्डू और हार गये तो छीनेंगे लड्डू कि ईवीएम ने मेरे हाथ वाले लड्डू को छीन लिया है। आत्मविश्वास की कमी इस प्रतिक्रिया में देखने को मिली।

कांग्रेस नेताओं ने रखा है संयम
हालांकि कांग्रेस की ओर से किसी बड़े नेता ने कोई बड़ी टिप्पणी करने से खुद को रोक रखा है। सम्भवत: यह पूरी चुनाव प्रक्रिया के दौरान अपनी पार्टी के लोगों पर राहुल गांधी का नियंत्रण ही रहा है कि उल्लेखनीय अनुशासनहीनता का उदाहरण देखने को नहीं मिला है। इकलौता उदाहरण मणिशंकर अय्यर का रहा, जिस पर पार्टी ने कार्रवाई की।
परिणाम जो हो, राहुल पर भरोसा कर सकते हैं कांग्रेसी
गुजरात के चुनाव को जीतना राहुल गांधी के नेतृत्व के लिए जरूरी है लेकिन हार के बावजूद कांग्रेसी राहुल की मेहनत पर भरोसा करना जारी रख सकते हैं क्योंकि इसमें कोई संदेह नहीं कि गुजरात का विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने पूरी गम्भीरता से लड़ा है। ऐसे में अच्छा होता कि कांग्रेस के शुभचिन्तक भी ईवीएम पर हायतौबा मचाने के बजाए संयम बरतते।
परफॉर्मेंस का है हार्दिक-जिग्नेश पर दबाव
चाहे हार्दिक पटेल हों या जिग्नेश- राजनीति में अपने परफॉर्मेंस को लेकर ये सशंकित हैं। कांग्रेस की हार का मतलब इनकी राजनीति की भी हार होगी। कांग्रेस तो सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के रूप में किसी हार को पचाना जानती है लेकिन हार्दिक और जिग्नेश जैसे नेता के लिए हार पचाने की आदत डालना थोड़ा मुश्किल है। यही वजह है कि जीत के दावे के साथ-साथ वे ईवीएम पर हार का ठीकरा फोड़ने को भी तैयार दिख रहे हैं।












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