Gujarat Assembly Election 2017: कांग्रेस के लिए भाजपा से ज्यादा संकट बन रहे अपने लोग
गांधीनगर। गुजरात में कांग्रेस बागियों से जूझ रही है। वो भी उस क्षेत्र में जहां मोदी लहर में भी कोई कांग्रेस को पछाड़ नहीं पाया था। ये क्षेत्र है उत्तर गुजरात का। इस बार गुजरात विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से ज्यादा घातक कांग्रेस के लिए उनके ही पार्टी के बागी नेता है। कांग्रेस के 19 बागी नेता चुनावी रण में उतर कर पार्टी के लिए सिरदर्द बन गए है। उत्तर गुजरात में कांग्रेस के 16 बागी चुनाव मैदान में हैं। उत्तर गुजरात में 6 जिले हैं, जिसमें गांधीनगर, बनासकांठा, साबरकांथा, अरवली, मेहसाना और पाटन शामिल है। 6 जिलों में 32 विधानसभाा सीटें हैं। बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां से 17 सीटें जीती थी,जबकि भाजपा को 15 सीटें मिली थीं। ऐसे में कांग्रेस के लिए यहां मुसीबत बढ़ गई है।

कांग्रेस को सबसे ज्यादा परेशानी बनासकांठा से हैं, जहां की पांच विधानसभा सीट, थारद, वडगाम, देसा, देवदार और कंकरेज शामिल हैं, सभी पर कांग्रेस के बागी नेता चुनावी रण में हैं। थारद में कांग्रेस ने मावजीभाई पटेल की जगह बीडी राजपूत को टिकट दिया है।मावजी भाई साल 2012 के विधानसभा चुनाव में 3473 मतों से हारे थे। मावजी भाई ने इस बार नामांकन किया है और पीछे हटने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही वडगाम सीट जहां से जिग्नेश मेवाणी चुनाव मैदान में है, वहां से भी कांग्रेस के 2 बागी चुनाव मैदान में हैं। वडगाम की सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित मानी जाती है।
वहीं गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले एबीपी न्यूज और सीएसडीएस ने प्रदेश में ओपिनियल पोल किया है। ओपिनियन पोल 50 विधानसभा बूथों पर 26-30 नवंबर के बीच ये पोल किया गया है। प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 43-43 फीसदी वोट मिल रहे हैं। वहीं सीटें भाजपा को 95 तो कांग्रेस को 82 सीटें मिल रही हैं। सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सुधारों से गुजरात के व्यापारी खुश नहीं हैं।












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