GSLV NVS-1 Navic: दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल होगा भारत, जानिए क्यों खास है नाविक सैटेलाइट

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन नेविक सैटेलाइट लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है। इसरो इसका लाइव प्रसारण करने जा रहा है।

GSLV NVS-1 Navic

GSLV NVS-1 Navic: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने जीएसएलवी एनवीएस-1 नाविक उपग्रह लॉन्च की तैयारी पूरी कर ली है। नए उपग्रह का लॉन्च सफल होने बाद खास तकनीकी हासिल करने वाला भारत दुनिया के चुनिंदे देशों में शामिल हो जाएगा। उपग्रह भारत के रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने का एक अहम उपक्रम है, इससे सैटेलाइट के जरिए सशस्त्र बलों को काफी मजबूती मिलने जा रही है।

GSLV NVS-1 Navic क्या है ?
नेविक सैटेलाइटक एक खास तकनीकी से बना उपग्रह है। ये पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किए जाने वाले सात उपग्रहों का एक समूह है, ग्राउंड स्टेशनों के साथ कनेक्ट होगा। ये उपग्रह खास कर सशस्त्र बलों की ताकत मजबूत करने और नौवहन सेवाओं (shipping services) की निगरानी की बनाया गया है। GSLV NVS-1 Navic को इसरो ने भारतीय तारामंडल के साथ मिलकर विकसित किया है। ये उपग्रह सौर सरणियों (solar arrays) से संचालित होगा। इसमें 2.4 kW तक की पॉवर प्रोड्यूस कर सकता है। उपग्रह में एक लिथियम-आयन बैटरी लगाई गई है।

सैटेलाइट का थर्मल कंट्रोल मैनेजमेंट काफी अपडेटेड है। से बाई प्रोपेलैंट सिस्टम से लैस है। सैटेलाइट का मिशन काफी लंबा चलने वाला है। इसरो के साइंटिस्ट्स के मुताबिक इस सैटेलाइट क लाइफ 12 साल है। इसे इसरो अहमदाबाद से लॉन्च करेगा। मिशन के 12 साल तक चलने की उम्मीद है और इसे स्वदेशी रूबिडियम परमाणु घड़ी के साथ लॉन्च किया जा रहा है। इसरो ने अपने बयान में कहा है कि यह एक महत्वपूर्ण तकनीक है जो अब तक कुछ ही देशों के पास मौजूद है।

सोमवार को होगा लॉन्च
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) नई पीढ़ी का ये सैटेलाइट NVS-1 लॉन्च करने का जा रहा है। इसरो की ओर से इसकी पूरी तैयारी की जा चुकी है। नया अंतरिक्ष यान भारतीय नक्षत्र (NavIC) श्रृंखला के नेविगेशन की एक हिस्सा है। सैटेलाइट का वजन 2,232 किलोग्राम है। एनवीएस-1 सोमवार को सुबह 10:42 बजे उड़ान भरेगा। इसका इसरो लाइव स्ट्रीम भी कर रहा है। इस लॉन्च का कवरेज इसरो की बेवासाइट पर श्रीहरिकोट से NVS-1 लाइव देखा सकेगा।

भारत की होगी बड़ी उपलब्धि
इसके मदद ने नौसेना के काफी मजबूत होने की उम्मीद की जा रही है। इसरो ने कहा, "भारतीय नक्षत्र श्रृंखला की सेवाओं को व्यापक बनाने के लिए एल1 बैंड सिग्नल विकसित किए गए हैं। ये पहला मौका होगा जब एनवीएस-01 एक स्वदेशी परमाणु घड़ी के साथ लॉन्च किया जाएगा। इसे इसरो श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से जीएसएलवी के जरिए लॉन्च करेगा।

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