• search

ग्राउंड रिपोर्ट : दिल्ली में पानी के लिए क्यों हुई एक दलित की हत्या?

Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    दिल्ली के वज़ीरपुर की झुग्गी बस्ती शहीद सुखदेव नगर में अब भी सब कुछ वैसा ही है जैसा शनिवार दोपहर से पहले था.

    पीपे, छोटे-बड़े हर तरह के बर्तन, और बोतलें अभी भी पानी भरे जाने के इंतज़ार में हैं.

    सप्लाई वाले पाइपों से अभी भी गंदला पीला पानी आ रहा है. खाने के बर्तन अभी भी धोए जाने के इंतज़ार में हैं.

    इस इलाक़े में पानी की बेहद ज़रूरत है. लेकिन यहां के लोगों को अब 'सरकारी पानी' नहीं चाहिए.

    शनिवार की दोपहर, टैंकर से पानी भरने को लेकर हुए झगड़े में 60 साल के वृद्ध लाल बहादुर की हत्या के बाद अब यहां के लोगों को 'सरकारी पानी' से डर लगने लगा है.

    दुनिया के 11 बड़े शहर जो बूंद-बूंद पानी को तरसेंगे

    पानी की कमी दूर करना कंपनियों के बस में नहीं

    वज़ीरपुर
    BBC
    वज़ीरपुर

    कैसे हुई लाल बहादुर की हत्या?

    17 मार्च, शनिवार को दिल्ली के शहीद सुखदेव नगर में लाल बहादुर का परिवार हर रोज़ की तरह काम पर जाने की तैयारी कर रहा था.

    लेकिन टैंकर आने की आवाजें सुनते ही लाल बहादुर के दोनों लड़के हाथों में बाल्टियां लेकर टैंकर के पास पहुंचे.

    स्थानीय नागरिकों के मुताबिक़, इस झुग्गी बस्ती में लोग टैंकर के पानी पर ही निर्भर हैं क्योंकि सप्लाई वाला पानी बेहद गंदा और पीले रंग का आता है.

    उस पानी को खाना बनाने में इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं. ऐसे में जब हर चार दिन बाद टैंकर आता है तो लोग ऊंची आवाजों में अपने घरवालों को बुलाना शुरू कर देते हैं.

    शनिवार का दिन भी और दिनों जैसा था. रिक्शा चलाने, फल बेचने और कबाड़ बेचने जैसे काम करने वाले वृद्ध लोग अपना काम करने के बाद आराम कर रहे थे.

    कबाड़ खरीदने-बेचने का काम करने वाले लाल बहादुर भी अपने घर पर आराम कर रहे थे. वहीं, उनके दोनों बेटे राहुल और रोहित पानी भरने की कोशिश में थे.

    BBC INNOVATORS: मिलिए बांध बनाने वाली एक महिला से

    'धान बोने वालों को नहीं मिलेगा बिजली-पानी'

    सुखदेव नगर
    BBC
    सुखदेव नगर

    आंखों के सामने...

    लेकिन तभी लाल बहादुर के छोटे बेटे 19 वर्षीय राहुल और इलाके के ही एक 25 वर्षीय शख्स सुनील के बीच पानी भरने को लेकर झगड़ा हो गया.

    लाल बहादुर के बेटे रोहित ने बीबीसी को बताया, "हम पानी भरने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन उन लोगों ने पानी का पाइप निकाल दिया. इसके बाद गाली गलौच शुरू कर दी और उन्होंने थप्पड़ मारे."

    इस दौरान आसपास के कई लोग मौजूद थे जिन्होंने अपनी आंखों के सामने इस घटना को देखा.

    लाल बहादुर की पड़ोसी और रिश्तेदार रंजीता ने बीबीसी को बताया, "लाल बहादुर हमारे जेठ जैसे थे. शनिवार की दोपहर वो आराम कर रहे थे कि तभी उनकी लड़की दौड़ते हुए घर में आई और अपने पापा को जगाते हुए बोला कि पापा कोई भईया को मार रहा है. ये सुनते ही 60 साल के लाल बहादुर नींद से उठकर वहां पहुंचे."

    इसके बाद नौजवानों के बीच पानी को लेकर हुए झगड़े में बीच-बचाव करने पहुंचे लाल बहादुर को दूसरे पक्ष के लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला.

    पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक नाबालिग समेत चार लोगों को गिरफ़्तार किया है. उन पर संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.

    वज़ीरपुर
    BBC
    वज़ीरपुर

    'पानी ने ले ली जान'

    पीड़ित परिवार की पड़ोसी इशरार्थी देवी बताती हैं, "पानी के चक्कर में जान चला गया. कई बार लड़ाई हो चुकी है. लेकिन ये ऐसी लड़ाई हुई कि जान चली गई."

    "अब टैंकर आये चाहे जल जाए, फुक जाए. ऐसे टैंकर आएगा, जान चला जाएगा तो कैसे पानी मिलेगा. अपना पानी रख लें टैंकर वाले. हम तो खरीद कर पी लेंगे. एक तो जान चला गया."

    शहीद सुखदेव नगर में पाइप के रास्ते भी पानी पहुंचाया जाता है.

    स्थानीय नागरिक कहते हैं कि इस पानी की हालत ये होती है कि इसे शौच में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

    'क्या तेज़ाबी पानी पीकर रहेगा आदमी?'

    शहीद सुखदेव नगर में ही रेलवे लाइन के किनारे रहने वाली सुनीता बताती हैं, "जब कभी-कभी सप्लाई का पानी आता है तो गंदे नाले का पानी आता है. तेजाब जैसा पानी आता है. वो पीकर आदमी रहेगा? पानी के चलते मर गया वो आदमी. अब उसके बाल बच्चों की क्या दशा होगी, केजरीवाल यहां आकर देखें..."

    वज़ीरपुर
    BBC
    वज़ीरपुर

    जब नेताओं ने एक न सुनी

    पानी की किल्लत से जूझ रहे इस क्षेत्र के कुछ लोगों ने आपस में मिलकर इस समस्या का एक हल निकाला है.

    इन लोगों ने आपस में एक-एक हज़ार रुपये जोड़कर बोरिंग कराई है. लेकिन इस बोरिंग का फायदा सिर्फ उन लोगों को मिलता है जिन्होंने चंदा करके बोरिंग कराई होती है.

    सीता देवी बताती हैं, "हम लोगों को बहुत दिक्कत होती थी. टैंकर से तो पानी मिल नहीं पाता था. आदमी लोग खड़े हो जाते थे. वो लोग मारपीट करते थे. हम लोग डर के मारे खड़े हो जाते थे. जिसके पास ज़्यादा ताकत होती थी वही टैंकर से पानी भर पाता था. किसी नेता ने हमारी बात नहीं सुनी. इसके बाद हमने मिलकर एक-एक हज़ार रुपये चंदा करके पैसा जुटाया और बोरिंग कराई. हम कितनी आफ़त उठाएंगे."

    वज़ीरपुर
    BBC
    वज़ीरपुर

    'अभी वो मरे हैं कल हम मरेंगे'

    पानी को लेकर हुए झगड़े में लाल बहादुर की हत्या के बाद लोगों में राज्य सरकार को लेकर गुस्से का माहौल है.

    यहीं रहने वाली एक लड़की जया कहती हैं, "कभी लाइट देंगे, कभी पानी देंगे, ऐसे झूठ बोल-बोलकर क्यों हमसे वोट ले लेते हैं. कभी ये देंगे, कभी वो देंगे लेकिन ये कुछ भी देने वाले नहीं हैं. हमें लेकर ये लोग आगे बढ़ते हैं लेकिन आखिर में हमें कुछ भी नहीं मिलता है. सिर्फ हमारी जानें जा रही हैं. कुत्ते की मौत मर रहे हैं हम लोग. कल वो मरा, कल हम मरेंगे. ऐसे एक-एक करके सब मर जाएंगे."

    आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने बताया कि सरकार ने इस घटना का संज्ञान लिया है. एक विधायक ने इलाके का दौरा किया है लेकिन मुआवजे के सवाल को उन्होंने टाल दिया और कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    BBC Hindi
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Ground Report Why did a Dalit kill for water in Delhi

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X