कोरोना के खिलाफ रणनीति बनाने में विशेषज्ञों से सलाह नहीं लेने की खबरों को सरकार ने किया खारिज
नई दिल्ली। देश में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। संक्रमितों की संख्या रोज रिकॉर्ड तोड़ रही है। इस बीच रविवार को केंद्र सरकार ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को आधारहीन बताया है जिसमें यह दावा किया जा रहा था कि सरकार कोरोना के खिलाफ रणनीति बनाने में विशेषज्ञों की सलाह नहीं ले रही है। सरकार ने यह भी कहा कि वह सामने आ रही जानकारी और जमीनी अनुभवों के आधार पर कोविड-19 के खिलाफ रणनीति को दुरस्त कर रही है। स्वस्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि मीडिया का एक धड़ा महामारी से लड़ने को लेकर भारत के फैसलों पर खबरें दे रहा है।

मंत्रालय ने जोर दिया कि कोविड-19 के मामलों में तेजी से वृद्धि की पृष्ठभूमि में लॉकडाउन का फैसला किया गया। मंत्रालय ने कहा कि संक्रमण के मामलों के दोगुना होने की दर निम्न स्तर पर है। जैसा कि कई पश्चिमी देशों ने अनुभव किया कि इसके बढ़ने से संक्रमण के मामले ज्यादा सामने आए और मृत्यु दर बढ़ने का भी खतरा था। मरीजों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी से स्वास्थ्य सेवा के धराशायी होने की आशंका वास्तविकता हो जाती।
बयान में कहा गया कि लॉकडाउन को लेकर सभी राज्य सरकारों के बीच सहमति थी। मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने पहले ही लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों से लाखों संक्रमण और हजारों मौतों के टलने संबंधी सूचना साझा की है। इससे स्वास्थ्य प्रणाली और लोगों की तैयारियों में बहुत फायदा हुआ है।
बयान के मुताबिक, 'यह नया वायरस है और अभी तक इसके बारे में पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं है। सरकार सामने आ रही जानकारियों और जमीनी अनुभवों के आधार पर रणनीति को प्रभावी बना रही है।' मंत्रालय ने कहा, 'जनस्वास्थ्य में यह सर्वज्ञात है कि महामारी के विभिन्न चरणों में अलग-अलग प्रतिक्रिया की जरूरत होती है। चरणबद्ध प्रतिक्रिया लचीले स्वास्थ्य प्रणाली की एक सकारात्मक विशेषता के रूप में जानी जाती है।'












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