अंग्रेजों के जमाने की सोने की खदानें फिर की जाएगी शुरू, आयात कम करना चाहती है सरकार
केंद्र सरकार की योजना है कि इन खादानों को शुरू कर सोने को आयात करने के खर्चे में कटौती की जा सके।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार बीते 15 सालों से बंद सोने की खानों को फिर से शुरू कर सकती है। सरकार की योजना है कि सोने का आयात कम किया जाए। साथ ही बंद की गई खानों में करीब 120 अरब रुपए के डिपॉजिट बचे हुए हैं। बता दें कि चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा सोने का आयात करने वाला देश है। वरिष्ठ अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इस संबंध में सरकारी की ओर से संचालित किए जा रहे मिनरल एक्सप्लोरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटडेट ने डिपॉजिट्स की सही गणना के लिए कर्नाटक स्थित कोलार गोल्ड फील्ड्स का अध्ययन शुरू कर दिया है।

कोलार गोल्ड फील्ड पहले भारत गोल्ड माइंस लिमिटेड के नियंत्रण में था। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार इस अध्ययन का काम एसबीआई कैपिटल्स को दिया गया। इस अध्ययन में यह भी पता लगाया जाएगा कि कामगारों और प्रशासनिक लोगों का कंपनी पर कितना उधार है। भारत, कच्चे तेल के बाद सबसे ज्यादा आयात सोने का करता है। हर साल करीब 200 अरब रुपए का खर्च सिर्फ सोने की खरीद पर आता है।
जानकारी के मुताबिक अगर कोलार माइंस शुरू हो गई तो आयात के खर्च में खासी कटौती हो सकती है। बता दें कि हर साल करीब 900 से 1,000 टन सोने का आयात भारकत करता है और 2 से 3 टन का उत्पादन किया जाता है। बता दें कि बेंगलुरू से 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कोलार फील्ड्स दुनिया की सबसे गहरी सोने की खान है। यह खान 1947 में भारत ने कब्जे में लिया था, लेकिन इससे लाभ नहीं होता था। ये खादान अंग्रेजों के जमाने के हैं। ये भी पढ़ें: सपा के साथ गबबंधन के बाद कांग्रेस के पोस्टर का नारा भी बदला












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