PK Rosy Google Doodle: पहली फिल्म के बाद लोगों ने जलाया था अभिनेत्री का घर, दलित होने की मिली थी सजा
केरल के त्रिवेंद्रम में राजम्मा के रूप जन्म लेने वाली रोजी ने 1928 में एक साइलेंट मलयालम फिल्म 'विगाथाकुमारन' में लीड रोल प्ले किया था, जिसका काफी विरोध हुआ था।

PK Rosy Google Doodle: आज दुनिया के सबसे बड़े सर्च ईंजन गूगल ने उस महिला को सम्मान देते हुए अपना डूडल समर्पित किया है , जो कि ता उम्र सम्मान के लिए तरसती रहीं, दरअसल गूगल ने आज का डूडल अभिनेत्री पीके रोजी के सम्मान में मनाया है, जो कि इंडियन सिनेमा की पहली दलित अभिनेत्री और मलयालम सिनेमा की पहली महिला एक्ट्रेस थीं। उनसे पहले मलयालम सिनेमा में महिलाओं का किरदार भी पुरुष ही निभाते थे।
फिल्म विगाथाकुमारन में लीड रोल प्ले किया
10 फरवरी 1903 को केरल के त्रिवेंद्रम में राजम्मा के रूप जन्म लेने वाली रोजी को बचपन से ही गीत-संगीत और अभिनय का शौक था और इसी शौक के चलते उन्होंने 1928 में एक साइलेंट मलयालम फिल्म विगाथाकुमारन में लीड रोल प्ले किया था, ये वो दौर था, जब महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था और ऊपर से रोजी एक दलित महिला थीं, उस वक्त दलित समुदाय के लोगों का छुआ लोग ना तो खाते थे और नहीं उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखते थे, ऐसे में उच्च जाति के लोग दलित महिला को बतौर अभिनेत्री स्वीकार नहीं कर पाए और इसी वजह से रोजी को एक्टिंग करने की भारी कीमत चुकानी पड़ गई और उन्हें लोगों की नफरत का शिकार होना पड़ा।
लोगों ने थियेटर और हिरोईन का घर जला दिया
दरअसल फिल्म में रोजी ने एक उच्चकुल की महिला का रोल प्ले किया था। फिल्म में उनके हीरो के साथ कुछ रोमांटिक सींस थे जिसे देखते ही उस वक्त उच्च समाज का एक वर्ग भड़क गया था और उन लोगों ने गुस्से में आकर थियेटर और हिरोईन का घर जला दिया था।
लॉरी में छिपकर बचाई जानी, झेलनी पड़ी जिल्लत
जब लोगों ने उनका घर जलाया था तो वो किसी तरह के जान बचाकर वहां से भाग निकलीं और एक तमिलनाडु जा रही लॉरी में बैठ गई थीं। बाद में उसी लॉरी के ड्राइवर केसावा पिल्लईचालक के साथ उन्होंने शादी रचाई और पूरा जीवन 'राजम्मल' के रूप में व्यतीत कर दिया। साल 1987 में रोजी का निधन हो गया और उन्होंने पूरा जीवन गुमनामी में ही व्यतीत कर दिया।
गुमनामी के अंधेरों से बाहर नहीं आ पाईं 'राजम्मल'
हालांकि बाद में चीजें सुधरीं और लोगों को पीके रोजी के बारे में पता चला तो लोगों ने उन्हें काफी खोजने की भी कोशिश की लेकिन वो गुमनामी के अंधेरों से बाहर नहीं आ पाईं, बाद में एक मलयालम सिनेमा के एक ग्रुप ने अपना नाम ही पीके सोसायटी रख लिया, ये उनकी ओर से उस अभिनेत्री को सम्मान और इज्जत देने के लिए किया गया था, जो कि पुरस्कार की हकदार थीं लेकिन कुछ जालिमों की वजह से उन्हें केवल जिल्लत ही नसीब हुई।












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