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COVAXIN: ह्यूमन ट्रायल से पहले एम्स से आई गुड न्यूज, हर 5 में 1 वालंटियर में मिली एंटीबॉडी?

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नई दिल्ली। भारत की पहली स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवाक्सिन (Covaxin) का राजधानी दिल्ली स्थित एम्स में ह्यूमन ट्रायल चल रहा है, लेकिन ह्यूमन ट्रायल से पूर्व ही शोधकर्ताओं ने एक राहत भरी खबर दी है। शोधकर्ताओं ने पाया कि ट्रायल में शामिल 20 फीसदी वालंटियर्स में एंटीबॉडी मौजूद था। यानी ह्यूमन ट्रायल के लिए चुने गए हर पांच वालंटियर्स में से 1 वालंटियर्स में रोग प्रतिरोधक क्षमता मौजूद थी।

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भारत में हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो रही है, एक सर्वे में भी मिला है सबूत

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दरअसल, शोधकर्ताओं ने जिन लोगों को ह्यूमन ट्रायल के लिए चुना था, उनमें से हर पांच वालंटियर्स में से 1 वोलेंटियर्स में रोग प्रतिरोधक क्षमता मौजूद थी, जिसके चलते ऐसे वालंटियर्स को वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के लिए अयोग्य घोषित कर दिए। इसका मतलब यह है कि भारत में हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो रही है, जिससे संक्रमित लोगों में एक वक्त के बाद बिना इलाज के वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज बननी शुरू हो जाती है।

वैक्सीन के ट्रायल में बीमार और संक्रमितों नहीं शामिल किया जाता है

वैक्सीन के ट्रायल में बीमार और संक्रमितों नहीं शामिल किया जाता है

किसी भी वैक्सीन के ट्रायल में उन लोगों को ही शामिल किया जाता है, जिन्हें कोई और रोग नहीं है, जो कोविड-19 से पीड़ित नहीं रहे हैं और जिनकी उम्र 18 से 55 साल से बीच है। एम्स में ट्रायल में शामिल होने पहुंचे 80 से ज्यादा वालंटियर्स के सेहत की जांच के बाद उनमें से सिर्फ 16 लोगों को ट्रायल के लिए चुना गया, क्योंकि संक्रमित व्यक्ति या एंटीबॉडीज विकसित करने वाले वालंटियर्स का ट्रायल संभव नहीं है।

दिल, गुर्दा, जिगर और फेफड़ा रोगी को ट्रायल में नहीं शामिल किया जाता

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ह्यूमन ट्रायल के लिए 18 से 55 वर्ष की उम्र के वैसे लोगों का चयन किया जा रहा है जो दिल (हर्ट), गुर्दा (किडनी), जिगर (लिवर) या फेफड़ा (लंग) से संबंधित बीमारी नहीं हो। साथ ही, उनमें अनियंत्रित डाइबिटीज या हाइपरटेंशन की समस्या भी नहीं होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के आखिरी चयन से पहले उनका लीवर, किडनी, कोविड- 19 और रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किए जाते हैं।

संक्रमित व्यक्ति पर कोरोना वैक्सीन का अध्ययन करना मुश्किल हैः डाक्टर

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एम्स के एक सीनियर डॉक्टर का कहना है कि ट्रायल में सिर्फ स्वस्थ वॉलंटियर्स को ही शामिल किया जाता है, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या कम है। करीब 20 फीसदी वॉलंटियर्स में एंटीबॉडी पाए गए हैं, जिसका मतलब है कि वे पहले ही संक्रमित हो चुके हैं। उनमें से कुछ लोगों को हार्ट और डायबिटीज की समस्या है। अगर व्यक्ति पहले संक्रमित हो चुका है तो उस पर वैक्सीन का अध्ययन करना मुश्किल है।

DGCI ने कोवाक्सिन के ह्यूमन ट्रायल पर 1-2 चरण की मंजूरी दी है

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कोवाक्सिन को हैदराबाद की भारत बायोटेक ने आईसीएमआर और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के साथ मिलकर विकसित किया है। इसके मानव परीक्षण की मंजूरी भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने हाल में दी थी। कोवाक्सिन के ह्यूमन ट्रायल पर पहले और दूसरे चरण के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दिल्ली स्थित एम्स समेत 12 संस्थानों का चयन किया है।

ह्यूमन ट्रायल के पहले चरण में टीके का 375 लोगों पर परीक्षण किया जाएगा

ह्यूमन ट्रायल के पहले चरण में टीके का 375 लोगों पर परीक्षण किया जाएगा

कोवाक्सिन वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल के पहले चरण में टीके का 375 लोगों पर परीक्षण किया जाएगा, जिनमें से अधिकतम 100 लोग एम्स से हैं। 24 जुलाई को एक 30 साल के पुरुष को कोवाक्सिन की पहली खुराक दी गई थी। वैक्सीन की पहली खुराक दिए जाने के बाद इनकी कम से कम दो हफ्ते तक निगरानी की जाएगी।

 संक्रमित लोगों में सार्स कोव- 2 के प्रति एंटीबॉडीज विकसित हो रहे हैं

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इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक एम्स में जब वैक्सीन ट्रायल के लिए वालंटियर्स का रजिस्ट्रेशन होने लगा तो 80 में से सिर्फ 16 लोगों का ही चयन किया जा सका। करीब 20 फीसदी वालंटियर्स में एंटीबॉडीज पाए गए हैं। अब वैक्सीन ट्रायल के हिसाब से देखें तो लगेगा कि इसमें थोड़ी बाधा आ रही है, लेकिन दूसरा पहलू यह भी है कि देश में एक बड़ी आबादी है, जिनमें सार्स कोव- 2 के प्रति एंटीबॉडीज विकसित हो रहे हैं, जो बिना स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के ठीक हो रहे हैं।

बिना लक्षणों वाले ऐसे संक्रमित मरीज खुद ब खुद ठीक हो रहे हैं?

बिना लक्षणों वाले ऐसे संक्रमित मरीज खुद ब खुद ठीक हो रहे हैं?

एम्स में ह्यूमन ट्रायल में शामिल होने पहुंचे 20 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज विकसित होना बताता है कि भारत में कही न कहीं हर्ड इम्यूमिटी शुरू हो चुकी है, जिसका मतलब है कि बिना लक्षणों वाले ऐसे संक्रमित मरीज खुद ब खुद ठीक हो रहे हैं। कह सकते हैं कि देश में कोरोना वायरस के खिलाफ हर्ड इम्युनिटी विकसित होना एक बड़ी राहत की बात है। सीरो सर्वे में भी 22 फीसदी से अधिक लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने का प्रमाण मिल चुका है।

भारत में कुल 12 संस्थानों में कोवाक्सिन का मानव परीक्षण किया जा रहा है

भारत में कुल 12 संस्थानों में कोवाक्सिन का मानव परीक्षण किया जा रहा है

भारतीय आर्युविज्ञान अनुसंधान संस्थान (ICMR) ने एम्स समेत देश के कुल 12 संस्थानों का चयन किया है जहां कोवैक्सीन का पहले और दूसरे चरण के मानव परीक्षण किया जा सकता है। पहले चरण में वैक्सीन का 75 लोगों पर परीक्षण होगा। इनमें सबसे ज्यादा 100 लोगों पर परीक्षण एम्स में होगा। दूसरे चरण में सभी 12 संस्थानों में 750 वॉल्युंटियर्स पर परीक्षण होगा।

कोवाक्सिन के ह्यूमन ट्रायल के लिए कोई भी इच्छुक शामिल हो सकता है

कोवाक्सिन के ह्यूमन ट्रायल के लिए कोई भी इच्छुक शामिल हो सकता है

हैदराबाद की दवा निर्माता कंपनी भारत बायोटेक ने नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरॉलजी, पुणे और आईसीएमआर के सहयोग से कोवैक्सीन विकसित किया है। भारतीय दवा नियामक ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) ने इसके पहले और दूसरे चरण के मानव परीक्षण की अनुमति दी थी। ट्रायल में भाग लेने का इच्छुक कोई भी व्यक्ति एक ईमेल ctaiims.covid19@gmail.com पर भेज सकता है या 7428847499 पर कॉल कर सकता है।

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English summary
India's first indigenous corona vaccine Covaxin is undergoing a human trial in AIIMS, the capital city of Delhi, but researchers have given a relief report before the human trial. Researchers found that 20 percent of the volunteers involved in the trial had antibodies. That is, 1 out of every five volunteers selected for a human trial was immune to disease.
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