प्राइवेट कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ेगी पेंशन

नई दिल्ली। प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे कर्मचारियों को अधिक पेंशन का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है। दरअसल ईपीएफओ की ओर से केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को खारिज कर दिया। केरल हाई कोर्ट ने ईपीएफओ को निर्देश दिया था कि वह सभी रिटायर होने वाले कर्मचारियों को उनकी पूरी सैलरी के आधार पर पेंशन दें। कोर्ट ने कहा था कि इन कर्मचारियों के योगदान की अधिकतम 15000 की सीमा को खत्म करे।

बढ़ेगी सैलरी

बढ़ेगी सैलरी

जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ की याचिका को खारिज किया है उसके बाद कर्मचारियों की पेंशन में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। मान लीजिए जो कर्मचारी 33 वर्ष से किसी कंपनी में काम कर रहे हैं और उनकी आखिरी सैलरी 50 हजार थी तो उन्हें कोर्ट के फैसले के बाद 25000 पेंशन मिलेगी, लेकिन कोर्ट के फैसले से पहले कर्मचारियों को सिर्फ 5180 रुपए ही मिलते। यानि कोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारी की सैलरी में 383 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।

पेंशन स्कीम में सीमा खत्म

पेंशन स्कीम में सीमा खत्म

यहां गौर करने वाली बात यह है कि एक तरफ जहां कर्मचारियों की पेंशन बढ़ेगी तो पीएफ की राशि का हिस्सा कम होगा क्योंकि अतिरिक्त पैसा ईपीएस के पास जाएगा नाकि पीएफ में में। बता दें कि केंद्र सरकार ने 1995 में कर्मचारी पेंशन स्कीम की शुरुआत की थी, जिसके तहत कंपनी को कर्मचारी की सैलरी में पेंशन स्कीम के तहत 8.33 फीसदी का योगदान करना होगा। इस योगदान नको अधिकतम 6500 रुपए सीमित किया गया था। मार्च 1996 में सरकार ने इसमे संशोधन करते हुए अगर कर्मचारी को आपत्ति नहीं हो तो यह पेंशन स्कीम के तहत योगदान को बढ़ा सकता है।

एक्ट में संशोधन

एक्ट में संशोधन

1 सितंबर 2014 को ईपीएफओ एक्ट में संशोधन हुआ जिसमे यह 8.33 फीसदी की सीमा को खत्म कर दिया गया। साथ ही इसमे एक और संशोधन किया था जिसमे कहा गया था कि जो कर्मचारी अपनी सैलरी के साथ पेंशन के लिए अर्ह हैं उनकी पेंशन को कर्मचारी के कार्यकाल के अंतिम पांच वर्षों की सैलरी के आधार पर तय किया जाएगा। पहले यह एक वर्ष की सैलरी के आधार पर तय किया जाता था। जिसकी वजह से कर्मचारियों की पेंशन कम हो गई थी। 1 सितंबर 2014 के इस संशोधन को केरल हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। अक्टूबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ को निर्देश दिया था कि वह पेंशन में कर्मचारियों की सैलरी के आधार पर उनके योगदान को स्वीकार किया जाए।

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