लोकसभा चुनाव 2024: विपक्ष के गठबंधन को लेकर DPAP चीफ गुलाम नबी आजाद ने बताई रणनीति
Opposition Alliance India: जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और DPAP के चीफ गुलाम नबी आजाद ने बुधवार को कहा कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले विपक्षी एकता से कोई लाभ नहीं दिख रहा है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक के बारे में पूछे जाने पर आजाद ने कहा कि उन्हें इसमें आमंत्रित नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की एकता का लाभ तभी होगा जब दोनों तरफ से कुछ प्रयास किए जाए। दोनों के लिए लाभों के हिस्से में अंतर हो सकता है- यह 50-50 या 60-40 हो सकता है, लेकिन इस मामले में, दोनों पक्षों के पास दूसरे को देने के लिए कुछ नहीं है।
पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का राज्य में कोई विधायक नहीं है और आश्चर्य है कि अगर दोनों दल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के साथ गठबंधन करते हैं तो क्या हासिल होगा?
उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन में क्यों शामिल होंगी बनर्जी? इससे उसे क्या लाभ होगा? इसी तरह टीएमसी का राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कोई विधायक नहीं है।
इसी तरह भी आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के पास एक भी विधायक एक भी विधायक नहीं है। जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाले दक्षिणी राज्य में सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के पास कहीं और कोई विधायक नहीं है। उन्हें कांग्रेस क्या दे पाएगी और वो कांग्रेस को क्या दे पाएंगे? उन्होंने कहा कि "विपक्षी एकता" एक "अच्छे फोटो अवसर" के अलावा और कुछ नहीं है।
गुलाम नबी आजाद चाहते हैं कि आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा को हराने के लिए विपक्ष एकजुट हो, लेकिन दुर्भाग्य से प्रत्येक विपक्षी दल के पास अपने राज्यों के अलावा अन्य राज्यों में कुछ भी नहीं है। यदि दो-तीन दलों ने राज्यों में (गठबंधन में) सरकारें बनाई होती तो यह फायदेमंद होता।
उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले गठबंधन है या चुनाव के बाद गठबंधन। उन्हें चुनाव पूर्व गठबंधन और चुनाव बाद गठबंधन में समान संख्या में सीटें मिलेंगी। चुनाव के बाद के गठबंधन वे ज्यादा अच्छी संभावना वाला मानते हैं।
पूर्व कांग्रेस नेता आजाद ने कहा कि जमीनी स्थिति यह है कि यदि विपक्षी दल चुनाव पूर्व गठबंधन में 300 सीटें जीतते हैं, तो गठबंधन न होने पर भी उन्हें उतनी ही सीटें मिलेंगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को केंद्र में नुकसान हुआ है, राज्यों में नहीं। जहां भी एक मजबूत राज्य नेतृत्व है, पार्टी वापसी कर रही है। अंतर केवल इतना है कि पहले केंद्रीय नेतृत्व राज्यों को चलाता था और अब, राज्य नेतृत्व केंद्रीय नेतृत्व चलाता है।
केंद्रीय नेतृत्व जमीन खो चुका है, लेकिन राज्य के नेता अपने क्षेत्र की रक्षा कर रहे हैं। इसलिए अगर कोई कहता है कि कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व के कारण राज्य चुनाव जीत रही है तो इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
आजाद ने जम्मू क्षेत्र के डोडा जिले में भूकंप से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी की। कहा कि हमारे पास जानकारी है कि गुंडोह और भद्रवाह तहसीलों में, कुछ स्कूलों, अस्पतालों और घरों को नुकसान पहुंचा है। यह चिंता का विषय है। हम आशा करते हैं कि अब भूकंप के झटके नहीं आएंगे।
उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि विद्यार्थियों के लिए कक्षाएं स्कूल की इमारतों के अंदर नहीं, बल्कि बाहर आयोजित की जाएं। इसी तरह अस्पतालों में गंभीर हालत वाले मरीजों को वहां रखा जाना चाहिए, जहां भूकंप का कोई असर नहीं हुआ हो।












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