ट्रिपल तलाक बिल: गुलाम नबी आजाद बोले- महिलाओं के नाम मुसलमानों को निशाना बना रही है सरकार
नई दिल्ली। राज्यसभा में मोदी सरकार ने मंगलवार को तीन तलाक बिल पेश किया गया। सदन ने इस बिल पर चर्चा के लिए चार घंटे का समय तय किया है। सदन में बिल पर चर्चा हो रही है। जहां बिहार में बीजेपी की सहयोगी जेडीयू और तमिलनाडु में एआईएडीएमके ने बिल का वॉक आउट कर दिया है। वहीं कांग्रेस और वाईएसआर कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया। बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबीं आजाद ने कहा कि, यह कानून राजनीतिक रूप से प्रेरित है, इसलिए अल्पसंख्यक अपने आप में लड़ने व्यस्त हैं। पति और पत्नी एक-दूसरे के खिलाफ वकील करेंगे और वकील को पैसे देंगे। सजा खत्म होने तक वे कंगाल हो चुके हों।

आजाद ने कहा कि, इस बिल का असली मकदस मुस्लिम परिवारों को तोड़ना है। सरकार मुस्लिम महिलाओं के नाम मुसलमानों को निशाना बना रही है। सरकार की साजिश है, ना रहे बांस, ना बजेगी बांसुरी, अब इस बिल के जरिए वह घर के चिराग से ही घर में आग लगाना चाहती है। घर भी जल जाएगा और किसी को आपत्ति भी ना हो, दो समुदायों की लड़ाई में केस बनता है लेकिन बिजली के शॉट में किसी के जलने पर कोई केस नहीं बनता है।
आजाद ने कहा कि, बिल में हमने जो आपत्तियां दर्ज की थी, उन्हें नहीं हटाया गया। थोड़ी-बहुत सर्जरी जरूर की है। कांग्रेसी नेता ने कहा कि, इस्लाम में शादी सिविल अनुबंध है जिसे आप क्रिमिनल शक्ल दे रहे हैं। वॉरंट के बैगर पुलिस को जेल में डालने का हक दे रहे हैं। साथ ही तीन साल की सजा, भत्ता और बच्चों-बीवी का ख्याल रखने का प्रावधान भी आपने बिल में डाल दिया है।अगर किसी पति को सजा होती है तो क्या महिलाओं को सरकार अपनी तरफ से पैसा देगी, लेकिन सरकार इसके लिए राजी नहीं है।
आजाद ने कहा कि हमारा मुल्क किसी मुस्लिम मुल्क का मोहताज नहीं है और ना ही किसी मुस्लिम के कहने से चलता है। देश के मुस्लिमों को देश पर गौरव है और हजारों सालों के साथ मिलकर रहते हैं। ना हम मुस्लिम देशों की नकल करते हैं और ना उनकी सोच रखते हैं। आजाद ने कहा कि किसी को पत्नी की शिकायत पर बीजेपी के किसी नेता को जेल भिजवा दीजिए फिर देखूंगा वो कैसे शांति से रहता है। यह प्रयोग पहले आप अपने किसी नेता के साथ करिए. फिर मैं खुद सदन में इस बिल को पास कराने के लिए कहूंगा।
आजाद ने कहा कि, ऐसा कानून नहीं लाएं जो राजनीति से प्रेरित हो और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला है। जेल से निकलने के बाद वो भीख मांगेगा या चोर बनेगा, यही आपकी मंशा भी है। आपने संरक्षण के लिए कोई प्रावधान रखा नहीं है आप सिर्फ जेल में भेजना चाहते हैं। यह कानून सत्ता का नशा है क्योंकि जब सत्ता आती है तो कुछ नजर नहीं आता है। क्या पति के जेल में रहने तक सरकार उस महिला का खर्चा उठाएगी? क्या उस महिला के बच्चों को पढ़ाएगी? आप जब ऐसा नहीं कर सकती तो महिला का क्या होगा। इस बिल में कोई भी प्रावधान मुस्लिम महिला के प्रॉटेक्शन के लिए नहीं है।












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