भूमि अधिग्रहण अधिनियम से जुड़े 8 भ्रम जिनके चलते छिड़ा विवाद
नई दिल्ली। भूमि अधिग्रहण को लेकर संसद के बजट सत्र में जमकर हंगामा मचा हुआ है। यही नहीं संसद के बाहर भी इस बिल की गूंज सुनाई दे रही है। आम आदमी पार्टी इस बिल के खिलाफ आज संसद घेरो अभियान चला रही है तो वहीं कांग्रेस सहित लगभग सभी विपक्षी दल इस बिल के विरोध में एकजुट हो गये हैं।

वहीं जहां इस बिल को आनन-फानन में मोदी सरकार अध्यादेश के जरिए संसद में लायी तो कांग्रेस ने इसपर जमकर सरकार पर निशाना साधा। लेकिन इस बिल को लेकर लोगों में कई प्रकार के भ्रम भी हैं जिसे केंद्र सरकार अलग-अलग मंच पर लोगों को समझा रही है।
इस बिल के बारे में कुछ अहम तथ्य जो आपको जानना चाहिए-
- प्रभावित परिवार के कम से कम एक सदस्य को अनिवार्य रोजगार दिया जाएगा
- केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा स्थापित किये जाने वाले केवल औद्योगिक गलियारे ही इस कानून के अंतर्गत आयेंगे।
- निजी शिक्षण संस्थान और निजी अस्पताल इस कानून के अंतर्गत नहीं आयेंगे।
- इस बिल के तहत प्रभावित होने वाले किसानों को मुआवजा यथावत पुराने बिल की तरह रखा गया है।
- सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस तरह की परियोजना के लिए आवश्यक न्यूनतम भूमि ही भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित की जाए।
- सरकार द्वारा स्थापित किये जाने वाले औद्योगिक गलियारे सड़क के दोनों किनारों से एक किलोमीटर की अधिक दूरी पर नहीं बनाये जायेंगे।
- भूमि अधिग्रहण, सहायता और पुनर्वास प्राधिकरण भूमि अधिगृहित किये जाने वाले जिलों में इस मामले से संबंधित बैठक एवं सुनवाई करेगा।
- न्यायालय दंड प्रक्रिया संहित की धारा 197 के तहत सरकारी कर्मचारियों के इस कानून से संबंधित अपराधों का संज्ञान ले सकता है।












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