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जानिये कैसे भाजपा-पीडीपी वादी में अलगाववादियों को कुचल सकती हैं

श्रीनगर। अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की गिरफ्तारी के बाद वादी के हालात काफी बिगड़ गये हैं। प्रदर्शनकारियों ने जेके में बंद का ऐलान किया है। वहीं प्रदर्शनकारियों के उग्र प्रदर्शन के चलते पुलिस को गोलिया चलानी पड़ी जिसके बाद एक युवक की मौत हो गयी। लेकिन इन सबके बीच सरकार को इन अलगाववादियों को रोकने के लिए क्या करना चाहिए यह अहम हो जाता है।

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गिरफ्तारी के बाद मसरत आलम ने कहा कि सरकार को जो करना है करे हम अपना यह अभियान आगे भी जारी रखेंगे। हालांकि आलम अब देशद्रोही गतिविधि के चलते सलाखों के पीछे हैं लेकिन सवाल यह है कि कितने समय तक उसे जेल में रखा जा सकता है।

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क्या-क्या बोला गया देशद्रोही रेली में

यहां बड़ा सवाल यह भी है कि बीजेपी-पीडीपी सरकार इन अलगाववादियों से कैसे निपटेगी। रैली के दौरान मसरत आलम और सैयद अली शाह गिलानी ने वहां मौजूद हुजूम से पाक के समर्थन में नारे लगवाये। दोनों ही नेता मेरी जान पाकिस्तान के नारे लगा रहे थे।

पीएम मोदी के हाथ खून से सने

यह भी बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस रैली में जमकर कोसा गया। रैली में कहा गया कि पीएम के हाथ खून से सने हैं, जिस तरह से रैली के दौरान मौजूद हुजूम जमकर नारे लगा रहा था मानो लग रहा था कि ये दोनों अलगाववादी नेता उनके सारे दुखों का समाधान कर देंगे।

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पाकिस्तान अमर रहे, हमे चाहिए पाकिस्तान जैसे नारे पूरी रैली के दौरान गूंजते रहे। यहा आश्चर्य करने वाली बात यह है कि इस रैली को पाकिस्तान के कई इलाकों में लाइव भी दिखाया गया।

भाजपा पीडीपी की बड़ी चुनौती

वादी में भाजपा और पीडीपी अपने सिद्धांतों के चलते एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि वादी में अलगावादियों की इस चुनौती से ये सरकार कैसे निपटेगी। साझा कार्यक्रम के तहत बनी इस सरकार के मुखिया मुफ्ती मोहम्मद सईद ने मुख्यमंत्री बनते ही वादी में शांतिपूर्ण चुनाव के लिए पाक को श्रेय दिया।

यही नहीं अलगाववादी नेता को रिहा करने के साथ ही कई विवादित बयान दिये। ऐसे में अगर मुफ्ती ने यह सब जानबूझकर किया तो भाजपा को एक बार फिर से इस बारे में सोचने की जरूरत है कि वादी में सरकार में बने रहना कितना कारगर है उसके लिए।

अलगाववादियों के समर्थन को खत्म करना बेहद अहम

जब तक अलगाववादी नेता मसरत आलम के असल इरादों को लोगों के सामने नहीं लाया जाता इन नेताओं पर काबू पाना काफी मुश्किल है। इन अलगाववादियों को स्थानीय लोगों का समर्थन प्राप्त है जिसके चलते ये ऐसी गुस्ताखी बार-बार करते हैं।

ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह लोगों के बीच इस बात का भरोसा जगाना होगा कि ऐसी उत्तेजक भीड़ से समस्याओं का समाधान नहीं निकलता है, ना ही लोगों के जीवन का स्तर बेहतर होने वाला है।

बाढ़ के वक्त कहां थे अलगाववादी

लोगों को इस बात को बताना जरूरी है कि अलगाववादियों के अपने हित हैं जिसे वह स्थानीयलोगों की आड़ में साधना चाहते हैं। इन लोगों को इस बात को भी बताना होगा कि ये अलगाववादी नेता उस वक्त कहां थे जब वादी में बाढ़ के चलते लोग अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहे थे।

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आपदा के समय बंगलों में आराम फरमाते हैं अलगाववादी

ऐसे तमाम साक्ष्य मौजूद हैं जिसकी मदद से लोगों को यह समझाया जा सकता है कि इन अलगाववादी नेताओं का लोगों की समस्या से कोई लेना-देना नहीं है। वादी में जब सैकड़ों लोग तड़प-तड़पकर बाढ़ के समय मारे गये तो ये नेता अपने आलीशान घरों में आराम फरमाते रहे ये कभी भी लोगों की जान बचाने के लिए सड़कों पर नहीं आये।

पीड़ितों की राहत को भी छीन लेते हैं अलगाववादी

वहीं एक रिपोर्ट भी सामने आयी थी कि जेकेएलएप के नेता यासीन मलिक ने बाढ़ के समय उस नाव को भी छीन लिया था जो बाढ़ पीड़ितों को बचाने का काम कर रही थी। बीजेपी-पीडीपी सरकार को लोगों का भरोसा जीतना होगा। भाजपा केंद्र सहित राज्य में भी सत्ता में है, ऐसे में भाजपा को अपने सारे राजनैतिक और वैचारिक मतभेद भुलाकर लोगों का भरोसा जीतने का हर संभव प्रयास करना होगा।

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अलगाववादी नेता यहां के लोगों की ना मिलने वाली सहूलियतों के चलते इन्हें भड़काने में सफल होते हैं। ऐसे में अगर यहा के लोगों के आर्थिक हालात में सुधार हो तो लोगों में सरकार के प्रति भरोसा बढ़ेगा और अलगाववादी नेताओं की ताकत में कमी आना स्वाभाविक है।

मसरत को रिहा किया जाना बड़ी भूल

हाल ही में मुफ्ती सरकार ने मसरत आलम को जेल से रिहा किया था जिसके बाद आलम ने एक रैली का आयोजन किया और पाकिस्तान के समर्थन में जमकर नारे लगाये साथ ही उसके समर्थकों ने पाक के झंड़े भी फहराये।

मसरत आलम को 2010 में वादी का माहौल बिगाड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मुफ्ती को इस बात की उम्मीद थी कि उनके फैसले का मसरत आलम सम्मान करेगा। लेकिन सम्मान तो दूर पिछले दिनों वादयों में जो भी हुआ वह देश को शर्मिंदा करने वाला है।

पाक के लिए झंड़ा फहराया जान सही

मसरत आलम ने रैली के दौरान पाकिस्ता के झंड़े फहराये जाने को सही बताते हुए लोगों से कहा कि लोगों में पाकिस्तान के समर्थन में भावनायें है, ये लोग पाकिस्तान के झंडे लाये और मैं इनका पूरा समर्थन करता हूं।

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