Pawan Khera की मुश्किलें बढ़ीं! गुवाहाटी HC ने ठुकराई अग्रिम जमानत,पासपोर्ट विवाद में अब गिरफ्तार होंगे खेड़ा ?

Pawan Khera Anticipatory Bail Rejected: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मामले में गुवाहाटी हाई कोर्ट ने शुक्रवार 24 अप्रैल को पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।

इस फैसले के बाद पवन खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।

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पासपोर्ट विवाद का क्या है पूरा मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल, 2026 को दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रिनिकी भुइयां शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र और एंटीगुआ-बारबुडा सहित तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि रिनिकी शर्मा की दुबई में दो आलीशान संपत्तियां हैं और अमेरिका (व्योमिंग) में उनकी एक कंपनी है, जिसमें करोड़ों का निवेश है। रिनिकी भुइयां शर्मा ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और झूठा बताते हुए गुवाहाटी के क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास केवल एक वैध भारतीय पासपोर्ट है और उनकी कोई विदेशी संपत्ति नहीं है।

अदालत में बहस के दौरान क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच जोरदार कानूनी जंग देखने को मिली। पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी करते हुए तर्क दिया कि यह मामला केवल 'राजनीतिक बदले' की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि खेड़ा के देश छोड़कर भागने का कोई खतरा नहीं है और यह केवल मानहानि का मामला है, जिसके लिए हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है।

असम के महाधिवक्ता (Advocate General) देवजीत लोन सैकिया ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि यह केवल मानहानि नहीं, बल्कि जालसाजी (Forgery) और धोखाधड़ी (Cheating) का गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में दस्तावेजों और टाइटल डीड्स के साथ छेड़छाड़ की गई है।

'जालसाजी और देशद्रोह की साजिश': पीयूष हजारिका का तीखा हमला

हाई कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद असम सरकार के मंत्री पीयूष हजारिका ने सोशल मीडिया (X) पर पवन खेड़ा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने खेड़ा को सीधे तौर पर अपराधी संबोधित करते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए। हजारिका ने कहा, हमें खुशी है कि माननीय हाई कोर्ट ने अपराधी पवन खेड़ा को जमानत देने से इनकार कर दिया। याद रहे, उन्होंने चुनाव परिणामों को प्रभावित करने और दूसरे देशों के साथ भारत के संबंधों को खराब करने के लिए जमीन के कागजात और पासपोर्ट के साथ जालसाजी की।

मास्टरमाइंड कौन? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या खेड़ा इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड हैं या वे किसी के 'डर्टी गेम' के केवल एक मोहरा (Front) मात्र हैं? मंत्री ने इस ऑपरेशन की फंडिंग पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इस 'नेफारियस ऑपरेशन' (कुटिल ऑपरेशन) के पीछे सीमा पार के कोई अंतरराष्ट्रीय तत्व शामिल हैं?

पूरे मामले में अब तक क्या हुआ?

  • 10 अप्रैल: तेलंगाना हाई कोर्ट ने खेड़ा को एक सप्ताह की 'ट्रांजिट अग्रिम जमानत' दी थी।
  • 15 अप्रैल: सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस की अपील पर तेलंगाना हाई कोर्ट के राहत वाले आदेश पर रोक लगा दी।
  • 21 अप्रैल: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
  • 24 अप्रैल: हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत की याचिका को आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया।

अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद असम पुलिस के पास पवन खेड़ा को गिरफ्तार करने का कानूनी अधिकार है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की लीगल टीम अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। राज्य में विधानसभा चुनावों के माहौल के बीच इस कानूनी लड़ाई ने सियासी पारे को और बढ़ा दिया है।

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