नरेंद्र मोदी को गंगा ने तो अपना लिया लेकिन बिहार की कोसी ने ठुकरा दिया

narendra modi
पटना। एक ओर जहां कोसी नदी को बिहार के लिए शोक कहा जाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी कहा जाता है कि कोसी नदी ऊपर से जितनी शांत रहती है, अंदर से उसकी धारा उतनी ही तेज होती है। इस तरह कोसी क्षेत्र की राजनीति भी अंदर से तेज होती है, जिसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल होता है। यही कारण है कि भारतीय जनाता पार्टी (भाजपा) के नेता नरेंद्र मोदी की 'सुनामी' ने पूरे देश में भले ही भगवा फहरा दिया हो, लेकिन बिहार के कोसी क्षेत्र में परिणाम मोदी लहर के विपरीत रहे।

कोसी इलाके की सभी सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ा। दीगर बात यह है कि पिछले चुनाव में इस क्षेत्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का बोलबाला था। अररिया हो या पूर्णिया, कटिहार हो या किशनगंज या सुपौल सभी सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी हार गए। मधेपुरा सीट पर तो भाजपा को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। पिछले लोकसभा चुनाव में कटिहार, पूर्णिया और अररिया पर भाजपा का कब्जा था।

इस चुनाव में कोसी के सुपौल में कांग्रेस प्रत्याशी रंजीता रंजन करीब 60 हजार मतों से विजयी हुईं, वहीं मधेपुरा से उनके पति और राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी पप्पू यादव ने जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव को 56 हजार से ज्यादा मतों से शिकस्त दी। कटिहार भाजपा के लिए निश्चित सीट मानी जा रही थी, लेकिन मतदाताओं ने यहां भी भगवा नहीं फहराने का निर्णय लिया। तीन बार से भाजपा के कब्जे वाली सीट पर निवर्तमान सांसद निखिल कुमार चौधरी को हार का मुंह देखना पड़ा। चौधरी को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकंपा) के प्रत्याशी तारीक अनवर ने 1.14 लाख से ज्यादा मतों से पराजित कर दिया।

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