MP News: गंगा दशहरा: जल संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना का संदेश, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ब्लॉग में बताया जल बचाने का महत्व

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव गंगा दशहरा के महत्व पर जोर देते हुए जल संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हैं। उन्होंने एम.पी. में सिंचाई, भूजल पुनर्भरण और सतत विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अमृत सरोवर, जल शक्ति और जिला-स्तरीय जल पुनर्भरण परियोजनाओं जैसी राष्ट्रीय और राज्य की पहलों का उल्लेख किया।

गंगा दशहरा के अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संरक्षण, भारतीय संस्कृति और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर एक विशेष ब्लॉग लिखा। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों को केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि देवी स्वरूप माना गया है और गंगा का स्थान सर्वोपरि है। गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है, जो गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है।

Ganga Dashara and Water Conservation in MP

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उनके नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय, जल जीवन मिशन, नमामि गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की गईं, जिन्होंने देश की जल सुरक्षा को नई दिशा दी है।

उन्होंने बताया कि अमृत सरोवर योजना के तहत प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के निर्माण और पुनरुद्धार का लक्ष्य रखा गया था। अब तक देशभर में 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर तैयार किए जा चुके हैं, जिनसे वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधाओं को बढ़ावा मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ का मंत्र दिया गया, जिससे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को प्रोत्साहन मिला। वहीं ‘कैच द रेन’ अभियान ने वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने पर जोर देते रहे हैं।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भी जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन का बड़ा अभियान बन चुका है। वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया गया था और वर्ष 2026 में भी इसे व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों और चेकडैमों का जीर्णोद्धार, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। साथ ही नए जल स्रोतों का निर्माण, वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के संधारण के साथ हजारों तालाबों के गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है और यहां की अर्थव्यवस्था जल संसाधनों पर आधारित है। बढ़ती जनसंख्या, अनियमित वर्षा और भूजल स्तर में गिरावट जैसी चुनौतियों के बीच जल संरक्षण अभियान बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण से सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी कृषि उत्पादन संभव हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्राचीन बावड़ियां, तालाब और जल संरचनाएं सांस्कृतिक धरोहर हैं। इनके संरक्षण से न केवल सांस्कृतिक गौरव बढ़ेगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि अभियान में ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, महिलाओं, युवाओं और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जल संरक्षण अब केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बन चुका है। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण अभियान से जुड़ने और जल बचाने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा, जब हर नागरिक जल संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएगा।

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