कर्नाटक: हुबली के ईदगाह मैदान में की गई गणपति की स्थापना, HC की अनुमति के बाद गणेश उत्सव शुरू
नई दिल्ली, 31 अगस्त: कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा जमीन पर गणेश चतुर्थी के उत्सव की अनुमति देने के अधिकारियों के फैसले को बरकरार रखने के बाद हुबली-धारवाड़ में ईदगाह मैदान में गणपति की मूर्ति स्थापित की गई थी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने हुबली में ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी अनुष्ठान की अनुमति देने वाले सरकारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर देर रात 10 बजे सुनवाई की। सुनवाई न्यायमूर्ति अशोक एस किनागी के कक्ष में हुई।

इससे पहले मंगलवार को इसी मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट में हुबली धाड़वाड के म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन द्वारा ईदगाह मैदान में तीन दिन की गौरी गणेश की पूजा के लिए दी गई मंजूरी को सही माना था। कोर्ट ने इसके साथ ही अंजुमन-ए-इस्लाम की ओर से दाखिल की गई याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि, बेंगलुरु के ईदगाह मैदान मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुबली की अंजुमन-ए-इस्लाम संस्था ने एक बार फिर हाईकोर्ट की शरण ली है। जस्टिस अशोक एस किनागि के चैंबर में याचिका पर सुनवाई हुई और कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला दे दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि ईदगाह वाली जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है। सरकार की तरफ से दलील दी गई कि संपत्ति विवादित है। इस दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने 400 किलोमीटर से अधिक दूर चामराजपेट में ईदगाह भूमि के संबंध में यथास्थिति का आदेश देते हुए कहा था कि हाईकोर्ट 2.5 एकड़ जमीन के स्वामित्व पर फैसला करेगा। वहीं, बेंगलुरू के ईदगाह मैदान में गणेशोत्सव समारोह नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बरकरार रखने के निर्देश दिए हैं। करीब दो घंटे की सुनवाई के बाद तीन जजों का यह फैसला आया। जस्टिस इंदिरा बनर्जी ने सुनवाई के दौरान कहा "भगवान गणेश से हमें कुछ माफी दिलाइए।" सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दोनों पक्षों पर लागू होगा। इससे पहले ईदगाह मैदान में गणेशोत्सव मनाने के मुद्दे पर तीन जजों की बेंच ने सुनवाई शुरू की। वक्फ बोर्ड की ओर से बहस करते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, ''200 साल से ये संपत्ति हमारे पास है और किसी दूसरे समुदाय ने यहां कभी कोई धार्मिक समारोह नहीं किया।'' सिब्बल ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट हमारे हक में फैसला सुना चुका है और पहले कभी किसी ने इसे चुनौती नहीं दी और अब 2022 में कहा जा रहा है कि ये विवादित है।












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