G7 to G20 Summit Difference: कितना अलग है जी-20 से जी-7? 5 प्वाइंट्स में समझें
G7 to G20 Summit Difference: इटली के अपुलिया क्षेत्र के बोर्गो एग्नाज़िया के आलीशान रिजॉर्ट में आयोजित जी-7 आउटरीच शिखर सम्मेलन में सभी 7 देशों अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, जर्मनी, कनाडा और जापान के क्लब सदस्य हाजरी लगाने पहुंचे। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के न्योते पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस सम्मेलन का हिस्सा बनने पहुंचे।
खास बात यह रही कि जी-7 का क्लब सदस्य न होने के बावजूद भारत को बुलाया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। दोनों नेताओं को एक दूसरे का अभिवादन 'नमस्ते' या हाथ जोड़कर करते हुए देखा गया। आपको बता दें कि लगातार 5वीं बार मोदी की इस सम्मेलन में भागीदारी रही है। ऐसे में सभी के जहन में यह सवाल उठना लाजमी है कि पिछले साल भारत में हुए जी-20 से यह जी-7 सम्मेलन कितना अलग है? आइए जानते हैं....

जी-7 कितना अलग है जी-20 से?
आपको बता दें कि जी-7 (G-7) और जी-20 (G-20) दोनों ही अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच हैं। लेकिन, उनके बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। इन दोनों मंचों के माध्यम से, विभिन्न देशों के नेता और अधिकारी वैश्विक आर्थिक स्थिरता, विकास, और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करते हैं। जी-7 अधिक तंग और विशेष मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि जी-20 अधिक व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण अपनाता है।
5 प्वाइंट्स में समझें
1-सदस्यता-
- जी-7: इसमें सात सबसे विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम, और संयुक्त राज्य अमेरिका आते हैं।
- जी-20: इसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं, जिनमें विकसित और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं दोनों शामिल हैं। जी-20 के सदस्य हैं अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, और यूरोपीय संघ।
2-उद्देश्य और ध्यान:
- जी-7: इसका मुख्य ध्यान आर्थिक नीतियों, व्यापार, सुरक्षा, और अंतरराष्ट्रीय विकास पर होता है। यह छोटे समूह में होने के कारण तेजी से निर्णय लेने और चर्चा करने में सक्षम होता है।
- जी-20: यह एक व्यापक मंच है, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता, वित्तीय नियमों, जलवायु परिवर्तन, और विकासशील देशों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह अधिक समावेशी है और वैश्विक दृष्टिकोण को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करता है।
3- प्रभाव और शक्ति:
- जी-7: इसमें शामिल देश विश्व की कुछ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और उनका वैश्विक वित्तीय और राजनीतिक मामलों पर बड़ा प्रभाव है।
- जी-20: यह वैश्विक जीडीपी के 80 फीसदी से अधिक, विश्व व्यापार के 75 फीसदी से अधिक, और वैश्विक आबादी के 60 फीसदी से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे इसका वैश्विक आर्थिक मामलों में व्यापक प्रभाव है।
4- मीटिंग्स और सम्मेलन:
- जी-7: इसकी वार्षिक बैठकें होती हैं, जिनमें सदस्य देशों के नेता महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
- जी-20: इसमें भी वार्षिक बैठकें होती हैं, लेकिन इनके अतिरिक्त वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नरों की भी नियमित बैठकें होती हैं।
5- इतिहास और स्थापना:
- जी-7: इसकी स्थापना 1970 के दशक में तेल संकट और वैश्विक मंदी के संदर्भ में हुई थी।
- जी-20: इसकी स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद वैश्विक आर्थिक सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।
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