G20 की पीएम मोदी और नीतीश वाली तस्वीर क्यों वायरल हो रही है, क्या अटकलें लग रही हैं?
बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ने के एक साल से भी ज्यादा समय बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दिल्ली में जी20 रात्रिभोज पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात क्या हुई, राजनीति में तरह-तरह की अटकलबाजियों का बाजार गर्म होने लगा।
सारी अटकलबाजियों की जड़ एक तस्वीर है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल है। इसमें पीएम मोदी बिहार के सीएम नीतीश कुमार और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन का परिचय अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से कराते नजर आ रहे हैं। तस्वीर में बाइडेन के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी मौजूद हैं। खुद पीएम मोदी ने भी अपने सोशल मीडिया पर इसे पोस्ट किया था।

इंडिया गठबंधन के कई सीएम रहे जी20 डिनर से दूर
गौरतलब है कि जी20 डिनर के लिए 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' के नाम से देश के सभी राज्यों के सीएम को निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन, इससे विपक्षी इंडिया गठबंधन के कई मुख्यमंत्रियों ने अलग-अलग कारणों से कन्नी काट लिया। जिस तस्वीर की बात हम कर रहे हैं, वह इसलिए खास है कि इसमें मौजूद दोनों ही सीएम इंडिया गठबंधन के ही सदस्य हैं।

कई महीनों बाद पीएम मोदी से हुई नीतीश की मुलाकात
पहले जी20 डिनर में विपक्ष शासित राज्यों के जिन मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना सबसे कम लग रही थी, उसमें नीतीश सबसे प्रमुख थे। क्योंकि, वे पिछले कई महीनों में ऐसे तमाम कार्यक्रमों में नहीं पहुंचे थे, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल होने वाले थे। यही नहीं विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन के भी असली सूत्रधार वही हैं, जिसका मुख्य एजेंडा ही पीएम मोदी और उनकी अगुवाई वाली बीजेपी-एनडीए का विरोध करना है। इंडिया बैठक की पहली बैठक उन्होंने पटना में ही आयोजित करवाई थी और उसकी कमान भी उन्होंने ही संभाली थी।
तेजस्वी की बैठक से अटकलें बढ़ गईं
इस तस्वीर के वायरल होने के बाद बिहार की राजनीति में तब सरगर्मियां और तेज हो गईं, जबकि नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की ओर से पार्टी नेताओं की अचानक बैठक बुलाए जाने की खबरें आने लगीं।
मांझी ने कहा- आने वाली राजनीति का इशारा
चर्चाएं शुरू हो गईं कि क्या नीतीश कुमार फिर कुछ अलग करने की सोच रहे हैं? जब इसी को लेकर मीडिया वालों ने नीतीश के पूर्व सहयोगी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी से पूछा तो उन्होंने इन कयासों को और हवा दे दी।
मांझी बोले, 'जी20 डिनर में जिस तरह से नीतीश शामिल हुए और पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से उनकी मुलाकात करवाई.....नीतीश पीएम मोदी को देखना नहीं चाहते थे......लेकिन कल (शनिवार की शाम) उनके साथ सटकर खड़े थे.....यह सब आने वाली राजनीति की ओर इशारा करता है......'
क्या नीतीश फिर पलटी मारेंगे?
सारी अटकलबाजियों की असल वजह नीतीश कुमार की राजनीतिक अस्थिरता है। उनके मन में क्या चल रहा है, इसकी भनक लगाना उनके करीबियों के लिए भी आसान नहीं है। तभी तो उनके डिनर में शामिल होने का अंदाज उनके कई नजदीकियों को भी अंतिम समय तक नहीं था। पिछले साल जब उन्होंने लालू यादव की पार्टी को दोबारा गले लगाया तो प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जैसे राजनीतिक धुरंधर भी उनका थाह नहीं लगा पाए। इससे पहले वे लालू यादव के साथ भी ऐसा ही कर चुके हैं।
बहरहाल नीतीश जब रात्रि भोज में 4 घंटे से भी ज्यादा रुक कर नीतीश लौटे और पत्रकारों ने उसके बारे में उनसे पूछ लिया कि कैसा रहा तो उन्होंने यही कहा....'अच्छा है.....अच्छा ही है....'। इसी के बाद से बिहार में सत्ताधारी जेडीयू और आरजेडी और विपक्षी बीजेपी के समर्थक सोशल मीडिया पर अपने-अपने हिसाब से इसपर मजे ले रहे हैं। जहां तक नीतीश का सवाल है कि क्या उनके पास अब फिर से एनडीए के खेमे में वापसी की गुंजाइश बची है तो यह बहुत ही मुश्किल सवाल है।
बीजेपी के लिए आफत में अवसर!
क्योंकि, पहली बात तो बिहार के सीएम इंडिया गठबंधन को मजबूत करने के लिए फिलहाल सक्रियता से जुटे दिख रहे हैं। दूसरी बात ये है कि बीजेपी के साथ उनका गठबंधन तभी संभव है, जब मोदी और शाह जैसे नेता वीटो लगा दें। क्योंकि, प्रदेश बीजेपी में नीतीश को लेकर अब काफी नाराजगी है। तीसरी बात आफत में अवसर खोजने वाली बीजेपी के लिए बिहार में जेडीयू के बगैर अपने सामने एक चुनौती जरूर दिख रही है, लेकिन खुला मैदान भी नजर आ रहा है, जहां विपक्ष में एनडीए के अलावा कोई भी प्रभावी नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी राज्य में अति-पिछड़ों, कुर्मी (अधिकतर)-कोयरी, दलित और ऊंची जातियों का एक ऐसा समीकरण बनाने में जुटी है, जो आरजेडी के एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण की जड़ें हिला सकता है। पार्टी को विधानसभा के उपचुनावों में इसका फायदा मिला भी है।
जहां तक तेजस्वी यादव की राजेडी की अचानक हुई बैठक का सवाल है तो बाद में सच्चाई यह सामने आई कि वह तो पहले से ही तय थी, जो कि लोकसभा चुनावों के मद्देनजर महागठबंधन की रणनीतियों को लेकर बुलाई गई थी।












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