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भगोड़े अपराधियों से 15,000 करोड़ रुपए की वसूली, विजय माल्या, नीरव मोदी समेत इन 10 मुजरिमों के बारे में जानिए

विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे भगोड़े आर्थिक अपराधियों के 19 मामलों में 15,113 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की गई है और उन्हें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को लौटा दिया गया है।

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा को यह जानकारी दी है। हालांकि, बैंक धोखाधड़ी से जुड़े इन मामलों में कुल रकम 40,000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा की है। जिसकी करीब एक-तिहाई की वापसी हुई है।

fugitive economic offenders

10 बड़े आर्थिक भगोड़े अपराधियों से वसूली
केंद्र सरकार के मुताबिक इन भगोड़े आर्थिक अपराधियों में से 10 नाम ऐसे हैं, जिन्हें सक्षम अदालतों ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर रखा है। हम यहां उन सब नामों और उनके काले कारनामों के बारे में बताने जा रहे हैं।

vijay mallya

विजय माल्या: इन भगोड़े आर्थिक अपराधियों में विजय माल्या का नाम सबसे बड़ा है। वह भारतीय बिजनेसमैन होने के साथ-साथ राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। वे यूनाइटेड ब्रुअरीज ग्रुप और किंगफिशर एयरलाइंस के चेयरमैन भी थे। 2010 से इनके आर्थिक गोरखधंधों का खुलासा शुरू हुआ। 2016 में यह भारत छोड़कर भाग गए और तब से यूके में रह रहे हैं। भारत इनके प्रत्यर्पण की कोशिशें कर रहा है, लेकिन फिलहाल यह अपराधी के तौर पर भारत आने से बचे हुए हैं।

nirav modi

नीरव मोदी: नीरव मोदी ने हीरे की ज्वेलरी बेचकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान कायम की थी। लेकिन, 2018 में खुलासा हुआ कि वह पंजाब नेशनल बैंक के साथ बहुत बड़ी धोखाधड़ी कर चुका है। उसपर आरोप है कि उसने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर बैंक को अरबों रुपए का चूना लगाया। मौका पाते ही वह उसी साल की शुरुआत में भारत छोड़कर फरार हो गया। उसे भी यूके से भारत लाने के लिए प्रत्यर्पण की कोशिशें जारी हैं।

नितिन जयंतीलाल संदेसरा , चेतन जयंतीलाल संदेसरा और दीप्ति चेतन जयंतीलाल संदेसरा: ये तीनों एक ही परिवार के भगोड़े अपराधी हैं। ये भारत में स्थित एक दवा कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड में डायरेक्टर रहे हैं। इनका नाम वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। इनकी कंपनी और इनपर लोन नहीं चुकाने, फंड के हेरफेर के आरोप हैं, जिसके चलते बैंकों को भारी नुकसान हो चुका है। स्टर्लिंग बायोटेक पर 5,000 करोड़ रुपए की लोन धोखाधड़ी का आरोप है। यह परिवार धोखाधड़ी के बाद देश छोड़कर भाग गया था।

हितेश कुमार नरेंद्रभाई पटेल: ये भी स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड से जुड़ा रहा है और इसपर 8,100 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी का आरोप है। बैंकों से लोन फर्जीवाड़े के लिए इसपर कई बेनामी कंपनियां चलाने का भी आरोप है। इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस पर इसे अल्बानिया में हिरासत में भी लिया गया था। बेनामी कंपनियों का इस्तेमाल बैंकों से लोन लेकर उसका आर्थिक अपराधों के लिए उपयोग करने का आरोप रहा है।

आसिफ इकबाल मेमन और जुनैद इकबाल मेमन: आसिफ इकबाल मेमन और जुनैद इकबाल मेमन कुख्यात गैंगस्टर इकबाल मिर्ची के परिवार से जुड़े हैं। इकबाल मिर्जी अंडरवर्ल्ड का सरगना था और संगठित अपराध की दुनिया में मशहूर था। इकबाल मिर्ची भगोड़े आतंकवादी दाऊद इब्राहिम का भी करीबी था। जब 2013 में उसकी मौत हो गई तो उसका परिवार मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों की जांच के दायरे में आ गया।

हाजरा इकबाल मेमन: हाजरा इकबाल, इकबाल मिर्ची की ही पत्नी है। 2021 में इसे इसके दो बेटों आसिफ और जुनैद के साथ भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। मेमन परिवार पर मुंबई में रियल एस्टेट की दुनिया से गैर-कानूनी तरीके से फंड जमा करने के आरोप हैं। 2021 तक ईडी ने इनकी करीब 800 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की थी।

रामचन्द्रन विश्वनाथन: देवास मल्टीमीडिया के फाउंडर रामचन्द्रन विश्वनाथन को भी भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है। इनपर आरोप है कि 2005 में इसरो के साथ एक डील करने के बाद स्टार्टअप के लिए मिले एफडीआई के 85% फंड को अमेरिका भेज दिया। 2011 में देवास सैटेलाइड डील रद्द कर दी गई थी। बेंगलुरु की विशेष अदालत ने भगोड़े आर्थिक अपराधी कानून के तहत विश्वनाथन की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया था।

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