आजादी के लिए जान गंवाने वाले शहीदे ए आज़म के बारे में खास बातें
आज का दिन एक ऐसी शख्सियत से जुड़ा जिसने देश की आजादी के लिए खुशी से फांसी के फंदे को गले लगा लिया था। एक ऐसा नौजवान जिसने हजारों नौजवानों में अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए देशभक्ति के बीज बो दिए थे। शहीद ए आजम भगत सिंह ने आज 28 सितंबर के दिन जन्म लिया था। अपनी युवा अवस्था में भगत सिंह ने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने के लिए आवाज बुलंद की थी। अंग्रेजी शासन की गुलामी के खिलाफ आवाज उठाना ही अंग्रेजी सरकार को नागवार गुजरा था।
तमाम अत्याचार और यातनाएं सहने के बाद भी भगत सिंह ने हार न मानते हुए अपने जीवन के अंत तक अंग्रेजों की मानसिकता और गुलाम भारत को आजाद करने के लिए प्रयास किया। हालांकि भगत सिंह के जन्म तिथि को लेकर आशंकाएं हैं। कई सूत्र बताते हैं कि भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर को हुआ था तो कई जानकारियों और दस्तावेजों के मुताबिक इनका जन्म 27 सितंबर बताया जा रहा है। खैर, यह त्रुटियां हो सकती हैं। आइए जानते हैं शाहीदे आजम भगत सिंह से जुड़ी कुछ खास बातेंः

भगत सिंह
पंजाब के एक किसान के घर जन्मे भगत सिंह को बचपन से ही पढ़ने लिखने का बड़ा शौक था। लाहौर में स्कूली शिक्षा के दौरान ही उन्होंने यूरोप के अलग अलग देशों में हुई क्रांति के बारे में अध्ययन किया। पढ़ने लिखने के बाद उन्होंने देश को आजाद कराने की ठानी।

एक आम युवा की तरह
लाला लाजपत राय की ओर से शुरू किए गए नेशनल कॉलेज ऑफ लाहोर में भगत सिंह पढ़ते थे। वीकीपीडिया के मुताबिक यह फोटो अपने सहपाठियों के साथ खिंचाई गई फोटो है। उन्होंने खूब पढ़ाई की चाहते तो वह विदेश जाकर या पढ़ लिखकर नौकरी कर सकते थे। लेकिन उन्होंने देशसेवा चुनी।

ऐसे किया था आगाज
1929 में भगत सिंह ने बटुकेश्वर दत्त और राजगुरु के साथ असेंबली में बम धमाके की योजना बनाई। बताया जाता है कि यह बम सिर्फ आजादी की लड़ाई के आगाज की सूचना अंग्रेजों के लिए पहुंचाना था। भगत सिंह और बटुकेश्वर ने एक एक बम फेंका। धमाके में किसी की मौत नहीं हुई थी। भगत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया। जेल में कैद रहने के दौरान भगत सिंह ने डायरी और किताबें भी लिखीं। अंग्रेजों ने 23 मार्च 1931 को लाहौर जेल में भगत सिंह को फांसी दे दी।

पूर्वजों का घर
कहा जाता है कि भगत सिंह के पूर्वजों का घर यही है। यहां पर भगत सिंह का जन्म स्थल भी माना जाता है। कहा जाता है कि यह घर भगत सिंह के पूर्वजों का घर था।












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