रघुराम राजन बोले- हिन्दू राष्ट्रवाद से थम जाएगी इकनॉमिक ग्रोथ, मूर्तियां नहीं स्कूल बनाए सरकार
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने नरेंद्र मोदी सरकार की हालिया नीतियों की आलोचना की है। रघुराम राजन ने कहा है कि हिन्दू राष्ट्रवाद ना सिर्फ सामाजिक तनाव बढ़ाएगा, बल्कि भारत को इसके आर्थिक विकास से भी भटकाएगा। एक मैगजीन में उन्होंने लिखा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में अस्वस्थता के संकेत मिल रहे हैं। देश में सत्ता का बहुत ज्यादा केंद्रीकरण हो गया है, जहां प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के पास ही सारी शक्तियां हैं। उनके मंत्रियों के पास कोई अधिकार नहीं हैं।

इंडिया टुडे पत्रिका के लिए लिखे लेख, 'How to fix the economy' में मोदी सरकार के सामाजिक-राजनीतिक एजेंडे पर उन्होंने कहा , सरकार को राष्ट्रीय और धार्मिक महापुरूषों की बड़ी-बड़ी प्रतिमाएं लगाने की बजाय मॉर्डन स्कूल और यूनिवर्सिटीज खोलनी चाहिए। जहां पर यहां के बच्चों का मानसिक विकास होगा, वे ज्यादा सहिष्णु और एक दूसरे के प्रति सम्मान जताने वाले बनेंगे। इससे ये बच्चे भविष्य की कॉम्पीटिशन भरी दुनिया में अपनी जगह बनाने में कामयाब होंगे।
रघुराम राजन ने लिखा है कि बहुसंख्यकवाद इस वक्त पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहा है और भारत भी इसका अपवाद नहीं है। उन्होंने लिखा, सत्ता में जो होते हैं उनकी एक प्रवृति होती है कि वे ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण चाहते हैं, मौजूदा सरकार भी अपवाद नहीं है, खासकर तब जब इस सरकार के सोशल और पॉलिटिकल एजेंडा का फोकस दिखता है। राजन ने अपने लेख में लिखा कि, हिन्दू राष्ट्रवाद न सिर्फ सामाजिक तनाव पैदा करेगा, जो किसी भी तरह से भारत के हित में नहीं है, बल्कि ये भारत के आर्थिक विकास पर भी असर डालता है, जिससे कि सामाजिक तनाव और भी बढ़ता है।
पूर्व आरबीआई गवर्नर ने जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के लिए नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि सरकार अपने ही अधिकारियों को कमजोर कर रही है, क्योंकि उन्हें भविष्य की सरकारों द्वारा भी ऐसी ही कार्रवाई का डर सताएगा। राजन ने लिखा है कि प्रोफेशनलिज्म का मतलब ये है कि जांच करने वाली और टैक्स एजेंसियों को किसी के पीछे पड़ने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये संदेश नहीं जाना चाहिए कि इनका राजनीतिक बदले की भावना से इस्तेमाल किया जा रहा है।












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