21वीं सदी के भारत में भी जातिगत भेदभाव, पिता को मिली थी 'हिंदू धर्म छोड़ने' की सलाह: मीरा कुमार
नई दिल्ली, 27 नवंबर। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने शुक्रवार को कहा कि 21वीं सदी के भारत में भी जातिगत भेदभाव मौजूद है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि देश में दो तरह के हिंदू हैं, एक वे जो मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं और दूसरे जो नहीं कर सकते। मीरा कुमार ने पहली बार जातिगत भेदभाव पर खुलकर बयान दिया है, उन्होंने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि दलित होने की वजह से कई लोगों ने उनके पिता को अपना धर्म बदलने की भी सलाह दी थी।

बीते शुक्रवार दलित समुदाय से आने वाली और पूर्व राजनयिक मीरा कुमार ने राजेंद्र भवन में आयोजित एक कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस दौरान कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने अपनी नई किताब "द लाइट ऑफ एशिया: द पोएम दैट डिफाइंड बुद्धा" पर एक व्याख्यान दिया, जिसके बाद पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ने जातिगत भेदभाव पर खुलकर बोला। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने उनके पिता बाबू जगजीवन राम को 'हिंदू धर्म छोड़ने' के लिए कहा था, क्योंकि उन्हें अपनी जाति के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ रहा था।
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मीरा कुमार ने आगे कहा, 'लेकिन मेरे पिता ने कहा था कि वह अपनी मौजूदा स्थिति से ऐसा नहीं करेंगे और इस जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ेंगे। मेरे पिता पूछा करते थे क्या धर्म बदलने से किसी की जाति बदल सकती है?' बता दें कि लाइट ऑफ एशिया' किताब सर एडविन अर्नोल्ड ने लिखी थी जो पहली बार 1879 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में कथात्मक कविता के रूप में बुद्ध के जीवन का वर्णन किया गया था। अपने व्याख्यान में जयराम रमेश ने कहा कि उनकी पुस्तक उस व्यक्ति की जीवनी है जिसने 'मानवता के पक्ष' को देखा, न कि 'बुद्ध का दिव्य पक्ष'। उन्होंने कहा कि उनकी पुस्तक में बुद्ध के उस पहलू पर भी जोर दिया गया है।












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