'वो मेरा व्यक्तिगत प्रयास नहीं था', मैग्सेसे पुरस्कार ठुकराने के बाद केरल की पूर्व मंत्री केके शैलजा
नई दिल्ली, 04 सितंबर। केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने रेमन मैग्सेसे पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया है। ये निर्णय उन्होंने अपनी पार्टी माकपा के साथ चर्चा के बाद लिया। उन्होंने एक बयान में कहा, "मुझे मैग्सेसे पुरस्कार समिति से एक पत्र मिला है। सीपीआईएम केंद्रीय समिति के सदस्य के रूप में, मैंने अपनी पार्टी के साथ इस पर चर्चा की और हमने साथ मिलकर पुरस्कार स्वीकार नहीं करने का फैसला किया।"

पूर्व स्वस्थ्य मंत्री केके शैलजा माकपा नेता ने कहा कि उन्हें पुरस्कार समिति से एक पत्र मिला है। जिसमें मैग्सेसे पुरस्कार देने के बात है। शैलजा ने कहा कि ये किसी राजनीतिक व्यक्ति को दिया जाने वाला पुरस्कार नहीं है। इसलिए पार्टी ने सामूहिक रूप से इस सम्मान को छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें जिस काम के लिए पुरस्कार देने के लिए विचार किया गया, वो वास्तव में सामूहिक प्रयास था। वो व्यक्तिगत तौर पर इसे प्राप्त करना सही नहीं मानती हैं।
रविवार इस पुरस्कार को लेकर मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद केके शैलजा ने कहा, 'शायद गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) कम्युनिस्ट विचारधारा के पक्ष में नहीं हों। इसलिए यह सही नहीं था कि मैं इसे एक व्यक्ति के रूप में प्राप्त करती क्योंकि मुझे यह उस चीज के लिए मिल रहा था, जो वास्तव में एक सामूहिक प्रयास था। इसलिए, मैंने पुरस्कार स्वीकार नहीं करने का फैसला किया।'
वहीं दावा किया जा रहा है कि मैग्सेसे कम्युनिस्ट विरोधी थे। इसलिए शैलाजा ने ये पुरस्कार लेने से मना कर दिया। इस मुद्दे पर वामपंथी नेताओं ने दावा किया है कि मैग्सेसे एक कट्टर कम्युनिस्ट विरोधी थे, जो 1950 के दशक में फिलीपींस में कम्युनिस्टों के हुकबलाहप सेंट्रल लुजोन के किसानों द्वारा गठित एक कम्युनिस्ट गुरिल्ला आंदोलन में हार कारण बने थे।












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