हिंडनबर्ग के आरोपों से सेबी प्रमुख होंगी कमजोर, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने गिनाए कारण
Hindenburg Row: पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने मंगलवार को कहा कि हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोप मुख्य रूप से अडानी पर नहीं, बल्कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) प्रमुख और उनके पति पर केंद्रित हैं। ज्ञात हो कि हिंडनबर्ग रिसर्च ने शनिवार को जारी एक रिपोर्ट में सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच पर अडानी समूह द्वारा उपयोग किए जाने वाले विदेशी फंड में निवेश करने का आरोप लगाया था ।
गर्ग ने पीटीआई से कहा है कि जो नई रिपोर्ट (हिंडनबर्ग के आरोप) आई है, वह माधबी बुच और उनके पति के खिलाफ है। यह वास्तव में अडानी के बारे में नहीं है।" उन्होंने चेतावनी दी कि ये आरोप सेबी प्रमुख की विश्वसनीयता को कम कर सकते हैं और उनकी स्थिति को कमजोर कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, "यह अडानी के खिलाफ जांच करने की सेबी प्रमुख की क्षमता पर सीधा आरोप है। मुझे लगता है कि यह काफी गंभीर है और सेबी अध्यक्ष के लिए खुद का बचाव करना मुश्किल होगा, जो आने वाले समय में उन्हें कमजोर बना देगा।"
सेबी प्रमुख के खिलाफ आरोप
हिंडनबर्ग रिसर्च की हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेबी ने अडानी समूह के खिलाफ एक अमेरिकी फर्म की 2023 की रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों पर कार्रवाई नहीं की, क्योंकि सेबी की प्रमुख माधवी पुरी बुच ने समूह से जुड़ी ऑफशोर फर्मों में निवेश किया था। फर्म ने व्हिसलब्लोअर्स के दस्तावेजों का हवाला दिया, जिसमें संकेत दिया गया है कि 2015 से बुच और उनके पति धवल बुच ने बरमूडा और मॉरीशस में ऑफशोर फंडों में निवेश किया था, जो कथित तौर पर अडानी समूह द्वारा बाजार में हेरफेर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली संस्थाओं से जुड़े थे।
ये नए दावे जनवरी 2023 में जारी एक अन्य जांच रिपोर्ट के बाद आए हैं, जिसमें अडानी समूह पर स्टॉक हेरफेर और वित्तीय कदाचार के माध्यम से "कॉर्पोरेट इतिहास में सबसे बड़ी धोखाधड़ी" करने का आरोप लगाया गया था। जनवरी की रिपोर्ट के कारण अडानी समूह को काफी वित्तीय नुकसान हुआ, जिससे उनके बाजार मूल्यांकन में 100 बिलियन डॉलर से अधिक की गिरावट आई।
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