जूनियर जजों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने पर पूर्व CJI ने जताया आश्चर्य
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आरएम लोढ़ा ने दो जजों का सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन किए जाने पर आश्चर्य जताया है। जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि जिस तरह से वरिष्ठ जजों को नजरअंदाज करते हुए दो जजों को कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में भेजने का प्रस्ताव भेजा वह चकित करने वाला है। मुझे लगता है कि कॉलेजियम को हमेशा पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए, साथ ही जजों को क्यों सुप्रीम कोर्ट भेजा जा रहा है उसकी वजह बतानी चाहिए।

कॉलेजियम एक संस्था है
जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि मुझे हमेशा से लगता है कि कॉलेजियम एक संस्थान की तरह होता है, ऐसे में यह किसी व्यक्ति का फैसला नहीं होना चाहिए बल्कि संस्था का फैसला होना चााहिए। अगर कॉलेजियम में विमर्श नहीं किया गया और बातचीत की कमी थी तो ऐसा हो सकता है। जूनियर जज को सुप्रीम कोर्ट भेजा गया है यह चौंकाने वाला है। कॉलेजियम के बारे में जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि कॉलेजियम एक गंभीर संस्था है, जिसमे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज होते हैं। लिहाजा यह काफी मजबूत संस्था है ना कि किसी व्यक्ति विशेष की संस्था। इस वजह से कॉलेजियम के फैसले काफी गंभीरता को परिलक्षित करने चाहिए।
तीन जजों को किया गया नजरअंदाज
जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि ना सिर्फ जस्टिस नादरजोग बल्कि दो और वरिष्ठ जज जस्टिस गीता मित्तल, जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस रविंदर भट्ट को भी नजरअंदाज किया गया। यही नहीं कर्नाटक हाई कोर्ट के जज जोकि राजस्थान से आते हैं उन्हें भी छह हफ्ते पहले नजरअंदाज किया गया। कॉलेजियम ने उन्हें भी सुप्रीम कोर्ट भेजने लायक नहीं समझाा। यह काफी परेशान करने वाली बात है। जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एसके कौल ने सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई को जस्टिस संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने और जस्टिस प्रदीप नादरजोग को नजरअंदाज किए जाने को लेकर पत्र लिखा था।
जस्टिस खन्ना कर सकते थे इंतजार
रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस कौल ने कहा था कि जस्टिस खन्ना से व्यक्तिगत तौर पर उनकी कोई वैमनस्यता नहीं है लेकिन वह अपनी बारी का इंतजार कर सकते थे। आपको बता दें कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कॉलेजियम की सिफारिश के बाद जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया है। मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में कुल 26 जज हैं, जबकि कोर्ट में जजों की अधिकतम संख्या 31 होनी चाहिए।
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