रूस-यूक्रेन सहित कई अहम मुद्दों पर पीएम मोदी-जर्मन चांसलर की बैठक, विदेश सचिव दी अहम जानकारी
विदेश सचिव ने बताया कि रूस यूक्रेन की स्थिति PM मोदी और चांसलर शोल्ज की चर्चा के महत्वपूर्ण मुद्दों में से है। उन्होंने जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज दो दिवसीय भारत दौरे को लेकर कई मुद्दों पर बात की।

Foreign Secretary Vinay Kwatra: जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज दो दिवसीय भारत दौरे पर हैं। शनिवार को उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। पीएम मोदी और ओलाफ स्कोल्ज के बीच नई दिल्ली स्थिति हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता हुई। वहीं अब उनके दौरे पर विदेश सचिव विनय क्वात्रा का बयान आया है। इस दौरान विदेश सचिव ने बताया कि रूस यूक्रेन की स्थिति PM मोदी और चांसलर शोल्ज की चर्चा के महत्वपूर्ण मुद्दों में से है।
रूस-यूक्रेन मुद्दे पर अहम चर्चा
शनिवार को मीडिया से बात करते हुए विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने जानकारी देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन, रक्षा सहयोग, रूस-यूक्रेन युद्ध सहित कई मुद्दों को लेकर द्विपक्षीय वार्ता हुई। रूस-यूक्रेन में चल रही स्थिति वैश्विक मोर्चे पर महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होने के कारण पीएम मोदी और चांसलर स्कोल्ज के बीच चर्चा में काफी व्यापक रूप से शामिल हुई। रूस यूक्रेन की स्थिति पर पीएम मोदी ने कहा कि हम किसी भी चीज का समर्थन करने के लिए तैयार हैं, जो शांति से संबंधित है, अगर आप PM की टिप्पणी को देखें जिसे उन्होंने समरकंद में कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है।
'शांति सिर्फ रूस और यूक्रेन के लिए...'
उन्होंने आगे कहा कि क्योंकि रूस-यूक्रेन स्थिति के सबसे गंभीर प्रभावों में से एक भोजन, ईंधन और उर्वरक असुरक्षा के मामले में रहा है। इसका अधिकांश प्रभाव विकासशील देशों पर पड़ा है। यदि आप इसे उससे जोड़ते हैं जो वह हमेशा कहते रहे हैं कि संवाद और कूटनीति किसी भी संघर्ष और शांति के समाधान के लिए आगे का रास्ता है। शांति सिर्फ रूस और यूक्रेन के लिए फायदेमंद नहीं है, यह कुछ ऐसा है जो बाकी के देशों के लिए भी फायदेमंद है।
व्यापार और निवेश पर हुई चर्चा
इसके अलावा उन्होंने बताया कि भारत जर्मनी का संबंध व्यापार और निवेश के मजबूत स्तंभ पर टिका है और चर्चा के दौरान चांसलर शोल्ज और पीएम मोदी ने हमारे द्विपक्षीय संबंधों की प्रकृति पर जोर देकर सराहना की कि यहां व्यापार और साझेदारी बहुत बड़ी है और बढ़ रही है। पीएम मोदी और चांसलर शोल्ज़ ने रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी अपनी चर्चा को आगे बढ़ाया। दोनों ने नोट किया कि यह रक्षा सहयोग भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
खालिस्तान मुद्दे पर पूछा सवाल
वहीं विदेश सचिव से जब पूछा गया कि क्या जर्मन चांसलर ने विशेष रूप से खालिस्तानी तत्वों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों से निपटने में सहायता की पेशकश की है तो उसके जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपनी प्रेस टिप्पणी में स्पष्ट रूप से कहा था कि आतंकवादी और अलगाववादी ताकतें भारत और जर्मनी के समाजों को कमजोर करती हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग आवश्यक है।
चांसलर शोल्ज़ ने जर्मन व्यवसायों के अगले एशिया प्रशांत सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डाला, जो उन्होंने कहा, 2024 में भारत में आयोजित होने की संभावना है। विदेश सचिव ने बताया कि चांसलर शोल्ज की भारत की अंतिम यात्रा 2012 में हैम्बर्ग के मेयर के रूप में हुई थी।












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