'सीमा पर अमन चैन के बिना संबंध नहीं सुधर सकते', विदेश मंत्री जयशंकर ने दिया चीन को स्पष्ट संदेश
भारत के विदेश मंत्री ने चीन से संबंध सुधार को लेकर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सीमा पर बिना शांति के संबंध नहीं सुधर सकते हैं।

चीन से सीमा विवाद को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि चीन के साथ संबंध सामान्य होने की कोई भी उम्मीद तब तक कारगर साबित नहीं हो सकती है जब तक पूर्वी लद्दाख में सीमा की स्थिति सामान्य नहीं होती है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत भी चीन के साथ संबंध सुधारना चाहता है, लेकिन ये तब ही संभव है जब सीमावर्ती इलाकों में शांति का माहौल बनेगा। ऐसे में दोनों देश तब तक आगे नहीं बढ़ सकते हैं जब तक दोनों देशों के बीच स्थिति सामान्य नहीं हो जाती है।
मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने पर आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि चीन एक मात्र प्रमुख शक्ति केंद्र है जिसके साथ भारत के संबंध हाल के दिनों में आगे नहीं बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को पीछे हटने का रास्ता खोजना होगा। भारत किसी भी तरह की दादागीरी या उकसावे वाले एक्शन से प्रभावित नहीं होता है। दोनों पक्षों को सैनिकों की वापसी के तरीके खोजने होंगे।
चीन के साथ रिश्तों के सवालों पर जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि ये सच है कि संबंध प्रभावित होते हैं और प्रभावित होते ही रहेंगे। 2020 में हुई सैनिकों की झड़प की बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस तरह सीमा पर आगे बढ़ने के कारण तनाव हिंसा का कारण बन सकता है। हम चीन के साथ संबंध सुधारना चाहते हैं लेकिन, ये तभी संभव होगा जब सीमावर्ती इलाकों में शांति और अमन कायम होगा।
साथ ही उन्होंने कहा कि भारत और चीन एक पड़ोसी और बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश हैं, जिनमें अच्छे संबंध होना जरूरी हैं। पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध बढ़ गया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सैन्य और कूटनीतिक वार्ता की एक श्रृंखला चली। चीन को छोड़कर बाकी प्रमुख देशों और प्रमुख समूहों के साथ भारत के अच्छे संबंध हैं। चीन ने जानबूझकर 2020 में सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना को स्थानांतरित करने केलिए समझौता तोड़ा, जिस कारण हमें भी मजबूर होना पड़ा।












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