एअर इंडिया का 49 फीसदी शेयर खरीदने के लिए विदेशी कंपनी ने जताई इच्छा
नई दिल्ली। एक विदेशी कंपनी एअर इंडिया का 49 फीसदी शेयर खरीदने के लिए आगे आई है। उड्डयन सचिव आर.एन. चौबे ने जानकारी दी है कि कंपनी की ओर से स्वेच्छा से एअर इंडिया का शेयर खरीदने के लिए इच्छा जाहिर की है। हालांकि शेयर खरीदने की इच्छा जाहिर करने वाली कंपनी की पहचान नहीं बताई गई है। बता दें सिंगापुर एयरलाइंस उन बड़ी कंपनियों में से एक हैं, जो एअर इंडिया का शेयर खरीदने को इच्छुक है। वहीं कतर एयरवेज ने भी एअर इंडिया को खरीदने की इच्छा जताई है। बीते दिनों कतर ने इंडिगो में भी हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई थी। वहीं इंडिगो ने खुद ही एअर इंडिया की एयरलाइन यूनिट को खरीदने की इच्छा व्यक्त की है। इंडिगो ने खासतौर पर एअर इंडिया ने इंटरनेशनल ऑपरेशन और एअर इंडिया एक्सप्रेस को खरीदने की इच्छा व्यक्त की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी यह बताना संभव नहीं है किस कंपनी ने एअर इंडिया के शेयर को खरीदने की इच्छा जताई है।

बीते दिनों खबर आई थी कि...
गौरतलब है कि बीते दिनों खबर आई थी कि सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को चार अलग-अलग कंपनियों में बांटकर निजी हाथों में बेचा जाएगा। एयर इंडिया के विनिवेश से ज्यादा रकम पाने के लिए उसे बिक्री के पहले चार कंपनियों में बांटे जाने की तैयारी है। नागरिक उड्डयन मंत्री जयंत सिन्हा ने इस बाबत जानकारी दी थी। सरकार विनिवेश के दौरान हर कंपनी में कम से कम 51 फीसदी की हिस्सेदारी जरूर बेची जाए। ब्लूमबर्ग में सोमवार को आई रिपोर्ट में नागरिक विमानन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा के हवाले से कहा गया है कि विनिवेश की यह प्रक्रिया 2018 के अंत तक पूरी कर ली जाएगी।

कर्ज प्रस्तावित कंपनी के पास ही रहेगा
एयर इंडिया कंपनी को मुख्य एयरलाइन कारोबार, क्षेत्रीय शाखाएं, जमीनी परिसंचालन और इंजीनयिरिंग परिचालन के हिस्से में बांटा जाएगा। मुख्य एयरलाइन कारोबार में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस शामिल है, जिन्हें एक कंपनी के तौर पर पेश किया जाएगा। सिन्हा ने कहा कि एयर इंडिया के कर्ज और परिसंपत्तियों को लेकर निवेशक की राय इस माह के अंत से ली जाएगी। उन्होंने बताया है कि सरकार एयरइंडिया के सामान्य कर्ज का वहन करेगी, वहीं मुख्य परिचालन से जुड़ा कर्ज प्रस्तावित कंपनी के पास ही रहेगा।

अगले 6 से 8 महीनों में कंपनी की बोली की घोषणा
इससे पहले भी बीते हफ्ते नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने बताया था कि अगले 6 से 8 महीनों में कंपनी की बोली की घोषणा हो जाएगी। उसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और कंपनी की संपत्ति ट्रांसफर करने में कुछ महीने का वक्त लगेगा। राज्यमंत्री ने जानकारी दी थी कि कि इंटरग्लोब एविएशन ने एयर इंडिया को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है।

52,000 करोड़ का घाटा होने का आंकड़ा
एयर इंडिया कई साल से घाटे में ही चल रही है। 2007 में एयर इंडिया में उसके घरेलू परिचालन इंडियन एयरलाइंस का विलय किया गया था लेकिन कंपनी घाटे में रही। 2015-16 में इस सरकारी कंपनी को 4,310 करोड़ का घाटा हुआ जबकि पिछले वित्त वर्ष यह घाटा बढ़कर 6,280 करोड़ हो गया। कंपनी को 52,000 करोड़ का घाटा होने का आंकड़ा है।












Click it and Unblock the Notifications