प्रोटोकॉल में भगवंत 7वें तो केजरीवाल 15वें स्थान पर, फिर पंजाब के सीएम की तौहीन क्यों ?
नई दिल्ली, 14 अप्रैल। अरविंद केजरीवाल ने 11 अप्रैल को दिल्ली में पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में पंजाब के मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी, ऊर्जा सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक में आल अफसर शामिल हुए थे। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस बैठक में मौजूद नहीं थे। मुख्य सचिव किसी राज्य का सर्वेच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है। कानूनी रूप से वह केवल अपने राज्य के मुख्यमंत्री को ही रिपोर्ट करता है और उनके प्रति ही जवाबदेह होता है। वह किसी अन्य राज्य का मुख्यमंत्री उससे जवाब तलब नहीं कर सकता।

क्या केजरीवाल ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण कर यह बैठक ली थी ? भारत के संघीय शासन व्यवस्था में आज तक ऐसा नहीं हुआ कि कोई मुख्यमंत्री किसी दूसरे राज्य के मुख्य सचिव के साथ बैठक कर वहां की प्रशासनिक जानकारी हासिल करे। बहुत से दलों की दो या उससे अधिक राज्यों में सरकारें रहीं हैं। लेकिन किसी मुख्यमंत्री ने किसी दूसरे राज्य के मुख्य सचिव को डिक्टेट नहीं किया है। अगर अरविंद केजरीवार आम आदमी पार्टी के संयोजक हैं तो भगवंत मान उनके प्रति उत्तरदायी हो सकते हैं। लेकिन केजरीवाल ने किस हैसियत से पंजाब के मुख्य सचिव को दिशा निर्देश दिये ? किसी राज्य का मुख्य सचिव किसी पार्टी के प्रति उत्तरदायी नहीं होता। क्या केजरीवाल ने भगवंत मान की हैसियत बताने के लिए यह बैठक की थी ?

क्या कठपुतली मुख्यमंत्री हैं भगवंत मान ?
भगवंत मान उम्र में अरविंद केजरीवाल से पांच साल छोटे हैं। वे मनीष सिसोदिया से भी दो साल छोटे हैं। इस लिहाज से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इन दोनों नेताओं के पैर छू कर आशीर्वाद लेते रहे हैं। अरविंद केजरीवाल अक्सर ये बात कहते रहे हैं कि भगवंत उनके छोटे भाई हैं। यानी भावनात्मक स्तर पर भगवंत मान को अरविंद केजरीवाल की सरपरस्ती हासिल है। लेकिन रिश्तों की मर्यादा अलग होती है और शासन की मर्यादा अलग। भगवंत मान एक पूर्ण राज्य के मुख्यमंत्री हैं और मुख्यमंत्री पद का एक प्रॉटोकॉल होता है। अगर शासन के नजरिये से देखें तो भगवंत मान का ओहदा, अरविंद केजरीवाल से से ऊपर है। पंजाब के एक पूर्ण राज्य है जबकि दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र है। दिल्ली राज्य नहीं है। दिल्ली की स्थिति अन्य केन्द्र शासित प्रदेशों से भी अलग है। दिल्ली के मुख्यमंत्री को अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री की तुलना में कम अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में अगर अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यसचिव और अन्य वरिष्ठ अफसरों के साथ दिल्ली में बैठक की तो यह पंजाब के मुख्यमंत्री की तौहीन है। इसलिए विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि भगवंत मान कठपुतली सीएम हैं और अरविंद केजरीवाल पंजाब के सुपर सीएम हैं।

मुफ्त बिजली का वायदा जी की जंजाल बना
केजरीवाल के साथ बैठक में पंजाब के ऊर्जा सचिव भी शामिल हुए थे। आम आदमी पार्टी ने पंजाब चुनाव के समय 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने का वायदा किया था। पंजाब की आबादी 3 करोड़ से अधिक है। इतने लोगों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देना आसान काम नहीं है। दिल्ली में केजरीवाल सरकार 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देती है। लेकिन पंजाब में 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने में कई दिक्कतें सामने आ रहीं हैं। दिल्ली में केवल 70 विधानसभा क्षेत्र हैं और ये सभी शहरी क्षेत्र हैं। जब कि पंजाब में 117 विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें अधिकतर गांव और कस्बों से जुड़े हैं। दिल्ली की तर्ज पर पंजाब में मुफ्त बिजली नहीं दी जा सकती और वह भी एक सौ यूनिट अधिक। इसी उलझे सवाल को सुलझने के लिए अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मुख्य सचिव और ऊर्जा सचिव को दिल्ली बुलाया था। मुफ्त बिजली देने की घोषणा भले आम आदमी पार्टी ने की थी लेकिन उसको लागू करने की जिम्मेदारी पंजाब सरकार की है। इस मामले में आम आदमी पार्टी का मुखिया कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। जानकारों का कहना है कि इस मामले में पंजाब के मुख्य सचिव और ऊर्जा सचिव ने भी अपने संवैधानिक उत्तरदायित्व का उल्लंघन किया है। इन्होंने अपने पद और गोपनीयता की शपथ का भी उल्लंघन किया है।

वरीयता क्रम में मान 7वें तो केजरीवाल 15वें स्थान पर
प्रधानता के क्रम (ऑर्डर ऑफ प्रेसिडेंस) में किसी राज्य का मुख्यमंत्री सातवें स्थान पर है। जब कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का मुख्यमंत्री 15वें स्थान पर आता है। यहां तक कि 'भारत रत्न' विजेता भी वरीयता के क्रम में सातवें स्थान पर हैं। यानी भारत रत्न से सम्मानित व्यक्ति भी दिल्ली के मुख्यमंत्री से अधिक विशिष्ट हैं। अगर किसी राज्य का मुख्यमंत्री दूसरे राज्य में जाता है तो उसकी वरीयता का क्रम 8वां हो जाता है। इस लिहाज से भी भगवंत मान, केजरीवाल से बहुत आगे हैं। अगर किसी सरकारी बैठक में भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल एक साथ मौजूद हों तो प्रोटोकॉल के हिसाब से मान को केजरीवाल से अधिक अहमियत प्राप्त होगी। पार्टी में भगवंत मान भले केजरीवाल के मतहत हैं लेकिन प्रशासकीय स्तर पर वे केजरीवाल से बहुत आगे हैं। अब ये आरोप लग रहा है कि अरविंद केजरीवाल वे भगवंत मान को उनकी हैसियत बताने के लिए ये बैठक की थी। वे यह जताना चाहते हैं कि पंजाब के राजकाज में भी उनकी ही मर्जी चलेगी। केजरीवाल पर आत्मकेन्द्रित होने का आरोप लगते रहा है। वे खुद से अधिक लोकप्रिय औँर योग्य नेता को स्वीकार नहीं करते। इसकी वजह से ही प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, योगेन्द्र यादव जैसे नेता अब उनसे अलग हैं। अरविंद केजरीवाल इस बात से असहज हैं कि भगवंत मान की वरीयता उनसे अधिक है। वे यह कभी नहीं चाहेंगे कि एक मुख्यनंत्री के रूप भगवंत मान इतने शक्तिशाली हो जाएं कि एक दिन उन्हें ही दरकिनार होना पड़े। इसलिए वे खुद को पंजाब का सुपर सीएम दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
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