कौन है लक्ष्मी, जिसका रोल फिल्म 'छपाक' में कर रही हैं दीपिका पादुकोण

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    जानिए लक्ष्मी अग्रवाल की सच्ची दर्दनाक कहानी, छपाक में दीपिका पादुकोण निभाएंगी किरदार | वनइंडिया

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की खूबसूरत अभिनेत्री दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म 'छपाक' (Chhapaak)को लेकर जबरदस्त चर्चा में हैं, यह फिल्म एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल (Laxmi Agarwal) की लाइफ पर आधारित है। फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई है, फिल्म का पहला लुक भी सामने आ चुका है जो कि इस वक्त सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    दीपिका पादुकोण ने फिल्म 'छपाक' का फर्स्ट लुक किया शेयर

    फिल्म का पहला लुक दीपिका ने खुद अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया था। अपनी फोटो को शेयर करते हुए दीपिका ने लिखा था कि 'एक ऐसा कैरेक्टर, जो हमेशा हमेशा मेरे साथ रहेगा.' उन्होंने यह भी जानकारी दी है कि फिल्म अगले साल 10 जनवरी को रिलीज होगी. इस फिल्म को मेघना गुलजार डायरेक्ट करेंगीं।

    दीपिका इस फिल्म की निर्माता भी हैं

    फिल्म में दीपिका के करेक्टर का नाम मालती है।फिल्म में दीपिका के को-स्टार विक्रांत मैसे हैं। दीपिका इस फिल्म को फॉक्स स्टार स्टूडियो के साथ मिलकर प्रोड्यूस भी कर रही हैं। यह शादी के बाद दीपिका की पहली फिल्म होगी।

    कौन हैं लक्ष्मी?

    कौन हैं लक्ष्मी?

    एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी शक्ति की जीती-जागती मिसाल हैं, उनका चेहरा दरिंदों ने तेजाब से बिगाड़ तो दिया मगर उनके हौसलों का बाल त‍क बांका नहीं कर सके। आज लक्ष्मी देश में एसिड अटैक की शिकार लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

    महज 15 साल में उजड़ गई दुनिया

    'मैंने किया इंकार तो उसने फेंका तेजाब'

    'मैंने किया इंकार तो उसने फेंका तेजाब'

    लक्ष्‍मी ने बताया था कि 22 अप्रैल 2005 की सुबह लगभग 10 बजकर 45 पर वो दिल्‍ली के भीड़-भाड़ वाले इलाके खान मार्केट में एक बुक स्‍टोर पर जा रही थी कि तभी वो अधेड़ इंसान अपने छोटे भाई की गर्लफ्रेंड के साथ आया और उसे धक्‍का दे दिया। धक्‍का लगते ही वो सड़क पर गिर गईं और उस युवक ने उनके ऊपर तेजाब फेंक दिया। लक्ष्‍मी ने बताया कि भगवान का शुक्र रहा कि मैंने उसके हमले को भांपते हुए अपनी आंखों को तुरन्त हाथ से ढक दिया था जिसके कारण मेरी आंखे बच पाई और आज मै आप लोगों को देख और समझ पा रही हूं।

    'आईना देखकर डर जाती थी मैं'

    'आईना देखकर डर जाती थी मैं'

    लक्ष्‍मी ने बताया था कि अटैक के बाद वो 2 महीने से ज्‍यादा समय तक राम मनोहर लोहिया अस्‍पताल में भर्ती रहीं। अस्‍पताल से निकलने के बाद घर आकर जब उन्‍होंने शीशा देखा तो उन्‍हें एहसास हो गया कि उनकी जिंदगी अब उजड़ चुकी है, मुझे आईने से डर लगने लगा था।

    मर्दों से नफरत हो गई थी लेकिन फिर मुझे आलोक मिला...

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    लक्ष्‍मी ने बताया कि वो लंबे समय तक पुरुषों से नफरत करती रहीं, वो प्रेम भरे गीत तो गाया करती थीं मगर उनके शब्द उनके लिए खोखले थे। उनका ये नजरिया तब तक रहा, जब तक वो आलोक दीक्षित से नहीं मिली थीं।

    आलोक दीक्षित कानपुरवासी हैं

    आलोक दीक्षित कानपुर के रहने वाले हैं और पत्रकार रह चुके हैं। उनकी मुलाकात लक्ष्मी से तेजाब हमलों को रोकने की एक मुहिम के दौरान हुई और फिर उन्हें एक दूसरे से प्यार हो गया। अब ये दोनों दिल्ली के पास एक इलाके में रहते हैं और अपने छोटे से दफ्तर से मिल कर तेजाब हमलों के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं।

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