Video: 20,000 फीट की ऊंचाई पर फाइटर जेट तेजस में भरा गया ईंधन, एलीट देशों के क्लब का हिस्सा बना भारत
बेंगलुरु। देश के पहले लाइट कॉम्बेट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस की पहली बार हवा में रि-फ्यूलिंग की गई है। हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की ओर से सोमवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की गई है। एचएएल की ओर से कहा गया है कि सोमवार को सुबह 9:30 बजे तेजस ने यह कामयाबी हासिल की जब 1,900 किलोग्राम का ईधन इसमें इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के एयरक्राफ्ट आईएल-76 के टैंकर से ट्रांसफर किया गया। एचएएल की ओर से बताया गया है कि 20,000 फीट की ऊंचाई पर तेजस में ईधन भरा गया था। इस एयरक्राफ्ट का एचएएल की ओर से ही डेवलप किया गया है। तेजस ने मिड एयर रि-फ्यूलिंग के साथ ही एक नया इतिहास रचा है।
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सफलता ने तेजस और आईएएफ को दिया मुकाम
आईएल78 को विंग कमांडर सिद्धार्थ सिंह उड़ा रहे थे और उन्होंने एचएएल के डिजायनर्स और एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) के साथ मिलकर इस मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। एडीए करीब से ग्वॉलियर में पूरे सिस्टम पर नजर रखे हुए थी। एचएएल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक तेजस की स्पीड 270 नॉट्स थी जब सभी टैंक्स और ड्रॉप टैंक्स को रि-फ्यूल किया गया। एचएएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर आर माधवन की ओर से बताया गया है कि इस सफलता के साथ ही तेजस दुनिया के उन देशों के एलीट क्लब का हिस्सा बन चुका है जिन्होंने सफलतापूर्वक एयर-टू-एयर (एएआर) रिफ्यूलिंग सिस्टम को मिलिट्र क्लास एयरक्राफ्ट के लिए डेवलप किया है।
आईएएफ ने की है 40 तेजस की मांग
तेजस ने सफलतापूर्वक हवा में ड्राइ डॉकिंग को भी चार और छह सिंतबर को अंजाम दिया है। ड्राइ डॉकिंग में कोई भी ईधन ट्रांसफर नहीं किया था। तेजस में मिड एयर रि-फ्यूलिंग को तीन माह पहले मिली उस सफलता के बाद अंजाम दिया गया है जिसके तहत एयरक्राफ्ट से एयर-टू-एयर बियॉन्ड विजुअल (बीवीआर) रेंज मिसाइल को फायर किया था। इंडियन एयरफोर्स की ओर से 40 तेजस मार्क-1 वर्जन का ऑर्डर दिया गया है और साथ ही दिसंबर में आईएएफ की ओर से एक रिक्वेस्ट प्रपोजल जारी किया गया है। इस प्रपोजल में एचएएल से 83 तेजस के एक और बैच को खरीदने का प्रस्ताव रखा गया ह जिसकी कीमत करीब 50,000 करोड़ होगी।

एक जुलाई 2016 को आई तेजस की स्क्वाड्रन
एक जुलाई 2016 को बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के तहत तेजस की स्क्वाड्रन जिसे 'फ्लाइंग डैगर्स' नाम दिया गया है, उसे एयरफोर्स में शामिल किया गया था। उस समय तेजस के दो वर्जन एसपी1 और एसपी2 को इंडियन एयरफोर्स में 45वीं स्कवाड्रन के तौर पर शामिल किया जा चुका है।यह दुनिया के किसी भी फाइटर जेट के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है। तेजस की तुलना फ्रांस के फाइटर जेट मिराज 2000, अमेरिका के एफ-16 और स्वीडन के ग्रिपेन से होती है।
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