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संसद में बोलीं वित्त मंत्री, भारत में मंदी की आशंका 0, अर्थव्यवस्था के संकेत पॉजिटिव

संसद के मानसून सत्र में लोक सभा में आज महंगाई के मुद्दे पर चर्चा हुई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चर्चा का जवाब दिया। finance minister nirmala sitharaman inflation discussion in lok sabha

नई दिल्ली, 01 अगस्त : लोक सभा में महंगाई पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत में मंदी की अटकलों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में मंदी या मुद्रास्फीति (Inflation) के कारण मंदी का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा, ब्लूमबर्ग की सर्वे में बताया गया है कि भारत में मंदी की संभावना 0 है।

sitharaman inflation discussion

इन्फ्लेशन के कारण मंदी का सवाल ही नहीं

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आंकड़ों का जिक्र कर कहा, अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में दूसरी तीमाही में 0.9% की गिरावट दर्ज की गई। पहली तिमाही में अमेरिकी जीडीपी 1.6% गिरी। अमेरिका ने इसे अनौपचारिक मंदी का नाम दिया। ऐसे में भारत में मंदी या मुद्रास्फीति जनित यानी Inflation के कारण मंदी का सवाल ही नहीं उठता।

सभी सरकारों ने निभाई भूमिका

बकौल वित्त मंत्री सीतारमण, हमने इस तरह की महामारी कभी नहीं देखी...हम सभी यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे थे कि हमारे निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों को अतिरिक्त मदद दी जाए। उन्होंने कहा, वे मानतीं हैं कि सभी सांसदों और राज्य सरकारों ने अपनी भूमिका निभाई है। अगर ऐसा नहीं होता तो भारत की स्थिति वैसी नहीं होती, जैसी स्थिति में उसकी तुलना दुनिया के बाकी हिस्सों से की जाती है।

भारत की पहचान मजबूत इकोनॉमी के रूप में

लोकसभा में निर्मला सीतारमण ने कहा, भारत की स्थिति अन्य देशों के मुकाबले बेहतर है। इसके लिए वे भारत के लोगों को पूरा श्रेय देती हैं। वित्त मंत्री ने कहा, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी हमारी पहचान सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में है। उन्होंने कहा, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पिछले 2 साल में भारत को विश्व बैंक, IMF और दूसरी वैश्विक संस्थाओं द्वारा विश्व की विकास दर और भारत की विकास दर के बारे में कई बार आकलन किया गया। बकौल वित्त मंत्री, हर बार जब उन्होंने आकलन किया है, विश्व की विकास दर उस अवधि में अनुमान से कम रही है, भारत की भी विकास दर अनुमान से कम रही है, लेकिन हर बार भारत की विकास दर सर्वाधिक रही है।

RBI के पूर्व गवर्नर का जिक्र

निर्मला सीतारमण ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के बयान का भी जिक्र किया। बकौल सीतारमण, शनिवार को रघुराम राजन ने कहा कि RBI ने भारत में विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के संबंध में अच्छा फैसला लिया है। पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में हुई समस्याओं से बचाने की दिशा में RBI ने अच्छा काम किया है।

भारतीय इकोनॉमी से पॉजिटिव संकेत

वित्त मंत्री ने कहा, रूस-यूक्रेन संकट, चीन के कई हिस्सों में लॉकडाउन, कोविड-19 की लहरें, ओमीक्रोन वेरिएंट जैसे फैक्टर्स के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद भी सरकार महंगाई को 7% से नीचे रखने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, GST संग्रह पिछले 5 महीनों से लगातार 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। 8 इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में जून में डबल डिजिट में बढ़ोतरी हुई। जून में कोर सेक्टर में वार्षिक दर से 12.7% की बढ़ोतरी दर्ज़ की गई। भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत सकारात्मक संकेत दिखा रही है।

चीन के 4000 बैंक दिवालिया होने के कगार पर

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों के चलते भारत सरकार पर कर्ज GDP का 56.9% है। IMF के डेटा के अनुसार भारत दूसरे देशों की तुलना में काफी अच्छी स्थिति में है जहां औसतन सरकार पर कर्ज़ GDP का 86.9% है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, भारत में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक के सकल NPA 2022 में 6 साल में सबसे निचले स्तर 5.9% पर हैं। चीन के 4000 बैंक दिवालिया होने के कगार पर हैं, लेकिन भारत में नॉन परफॉर्मिंग असेट (NPA) कम हो रहे हैं।

राजनीतिक चर्चा का जवाब भी पॉलिटिकल ही होगा

इससे पहले उन्होंने लोक सभा में नियम 193 के तहत हुई चर्चा का जवाब देने की शुरुआत में कहा, करीब 30 सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा लिया। विस्तार से भावनाएं जाहिर करने के लिए सबका आभार, लेकिन कई बिंदुओं को छोड़ कर चर्चा राजनीतिक रही है। इसलिए जवाब भी राजनीतिक ही होगा। उन्होंने तमिलनाडु के सांसदों की ओर मुखातिब होकर कहा कि केंद्र सरकार ने दो बार ईंधन की कीमतें घटाईं, लेकिन चुनावी घोषणा पत्र में वादे करने के बावजूद डीएमके सरकार खामोश है। जनता को कोई राहत नहीं दी गई। सवाल केंद्र सरकार से पूछे जा रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु सरकार कीमतों में कटौती न करने पर जो तर्क दे रही है, वे भी हास्यास्पद हैं। कभी कहा जा रहा है कि डीजल के उपभोक्ताओं की सटीक संख्या की जानकारी नहीं, कभी कहा जा रहा है कि राज्य सरकार ने कीमतों में कटौती के लिए कोई डेडलाइन फिक्स नहीं की है।

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