आज के हालात में कश्मीर के लोग खुद को भारतीय नहीं मानते- फारूक अब्दुल्ला
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटे एक साल से ज्यादा का वक्त हो गया है। हाल ही में रिहा हुए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद फारूक अब्दुल्ला भी संसद के मानसून सत्र में हिस्सा ले रहे हैं, जहां उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 फिर से बहाल करने की मांग उठाई। फारूक अब्दुल्ला के मुताबिक घाटी के लोग मौजूदा हालात में ना तो खुद को भारतीय महसूस करते हैं और ना ही चीन को अंदर आने देना चाहते हैं।

एक इंटरव्यू में फारूक ने कहा कि अगर सरकार को कोई ऐसा कश्मीरी मिल जाए, जो खुद को भारतीय कहे तो मुझे आश्चर्य होगा। उनके मुताबिक कश्मीरी का ऐसा मूड इसलिए है क्योंकि वो अब सरकार पर भरोसा नहीं कर सकते हैं। विभाजन के वक्त घाटी के लोगों के लिए पाकिस्तान के साथ जाना आसान था, लेकिन वे गांधी के भारत में शामिल हुए, ना कि मोदी के भारत में।
उन्होंने कहा कि आज चीन दूसरी तरफ से आगे बढ़ रहा है। अगर आप घाटी के लोगों से बात करेंगे तो वो यही कहेंगे कि उन्हें पता है कि चीन अपने क्षेत्र में मुस्लिमों के साथ क्या कर रहा है। मैं इस बारे में सीरियस नहीं हूं, लेकिन मैं ईमानदार जरूर हूं। फारूक के मुताबिक घाटी के लोग पाकिस्तान भी नहीं जाना चाहते हैं क्योंकि वहां पर भी युद्ध जैसा माहौल है। केंद्र पर आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि अगर वो घाटी में कहीं भी भारत के बारे में बोलते हैं तो कोई सुनने वाला नहीं है। उन्होंने पूछा कि जब घाटी में एके-47 लेकर हर जगह सुरक्षाकर्मी मौजूद हैं, तो वहां पर स्वतंत्रता कहां है।
लोकसभा में उठाई ये मांग
फारूक अब्दुल्ला ने लोकसभा में फिर से जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा बहाल करने की बात उठाई। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त (जिस दिन अनुच्छेद 370 हटा) के बारे में सोचने की जरूरत है। घाटी में अभी भी शांति नहीं आई है। मध्य कश्मीर में आज भी एनकाउंटर चल रहा है। जब तक सरकार अनुच्छेद 370 से संबंधित फैसलों को नहीं वापस लेती, तब तक वहां पर शांति नहीं आएगी।












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