'मुसलमान का खून बह जाए तो', फारुख अब्दुल्‍ला अब किस बात पर हुए खफा? अग्रेंजो का भी किया जिक्र

Jammu Kashmir News: नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने "लायन ऑफ नौशेरा" नामक पुस्तक के विमोचन समारोह में हिस्‍सा लिया। इस दौरान उन्‍होंने कहा, "अगर मुसलमान का खून बहता है, तो कोई परवाह नहीं करता, लेकिन अगर हिंदू का खून बहे, तो पूरा देश खड़ा हो जाता है।

अब्दुल्ला ने विभाजन के समय की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना को लगता था कि कश्मीर मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और भारत के बजाय पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा।

Farooq Abdullah

बता दें बता दें ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान पर लिखी गई "द लायन ऑफ नौशेरा" नामक पुस्तक के सह-लेखक जिया उस सलाम और आनंद मिश्रा हैं। उनकी किताब के उद्धाटन के मौके पर फारुख अब्दुल्‍ला ने यह टिप्पणी की।फारूक अब्दुल्ला ने विश्वास जताया है कि भारत मौजूदा चुनौतियों का सामना करने में सफल रहेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश से धर्मनिरपेक्षता को खत्म नहीं किया जा सकता।

अब्दुल्ला ने ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 1948 के भारत-पाक युद्ध के दौरान, कश्मीर के हिंदू, मुस्लिम और सिख समुदायों ने मिलकर बाहरी खतरों का मुकाबला किया था। उन्होंने शेख अब्दुल्ला के उस महत्वपूर्ण निर्णय को भी याद किया, जब उन्होंने जिन्ना के पाकिस्तान के बजाय गांधी के भारत के साथ रहने का विकल्प चुना था।

अग्रेंजो का भी किया जिक्र

फारुख अब्दुल्‍ला ने अंग्रेजों पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने ऐसी परिस्थितियां पैदा कीं, जहां हिंदू राजा होने पर भी अगर लोग मुस्लिम बहुल हों, तो उन्हें अपनी पसंद की जगह चुनने का मौका मिलेगा, जैसा जूनागढ़ और हैदराबाद में हुआ था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर में मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जिस देश के साथ उन्होंने हाथ मिलाया, वहां उनके लिए कोई प्यार या सोच नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोगों ने सरकार चुनी है, तो ताकत उपराज्यपाल के हाथों में क्यों है। यह बयान उनकी पार्टी की केंद्र सरकार पर लगातार हमलों का हिस्सा है, जो जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रही है।

25 किताबों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले की भी आलोचना की

इसके साथ ही फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में 25 किताबों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ये किताबें कश्मीर के इतिहास से संबंधित थीं, और प्रशासन इसे भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। उल्लेखनीय है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस इंडिया गठबंधन का हिस्सा है और अब्दुल्ला ने 7 अगस्त को हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में भी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का मुद्दा उठाया था।

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