ट्रैक्टर मार्च में शामिल 16 किसान लापता, 122 गिरफ्तार किए गए: संयुक्त किसान मोर्चा
किसान नेता बोले- तीन बार बिंदुवार बता चुके कानून में क्या-क्या काला
नई दिल्ली। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आठ महीने से आंदोलन कर रहे किसानों ने कहा है कि केंद्र की सरकार इस मुद्दे पर झूठ का सहारा ले रही है। शनिवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी प्रेस वार्ता में कहा कि सरकार कहती है कि किसान उनको कानून की कमियां नहीं बता रहे हैं, बस कह रहे हैं कि ये कानून काले हैं। सरकार की ये बात पूरी तरह गलत है। सरकार के साथ जो बैठकें किसान संगठनों के नेताओं की हुई हैं, उनमें बहुत स्पष्टता से केंद्रीय मंत्रियों के सामने कानून की कमियों को किसान नेताओं ने रखा है। किसान मोर्चा ने ये बा कहा है कि ट्रैक्टर मार्च में शामिल 16 किसान अभी तक लापता हैं, जबकि 122 जेलों में हैं।
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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसंद में अपने भाषणों में किसान आंदोलन को लेकर कहा है कि कानून वापसी की मांग लगातार की जा रही है। इनको लगातार काला कानून कहा जा रहा है लेकिन ये कोई नहीं बता रहा है कि इनमें काला क्या है। सब बस कानूनों के रंग पर ही बात कर रहे हैं। किसान नेता, बलबीर सिंह राजेवाल ने इसको लेकर केंद्र सरकार पर बरसते हुए कहा, भारत सरकार झूठ बोलकर सारे देश को गुमराह कर रही है। सरकार कह रही है कि हमें बताया नहीं जा रहा कि इन कानूनों में काला क्या है। सरकार के साथ 11 बैठक करके 3 बार एक-एक क्लॉज पर बता चुके हैं कि इनमें काला क्या है। सरकार ही समझने को तैयार नहीं है तो क्या किया जाए।
122 किसान गिरफ्तार किए गए हैं
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर ये भी कहा गया है कि आंदोलन में शामिल किसानों को लगातार झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है और परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 122 किसानों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं 16 किसान लापता हैं। मोर्चे ने 26 जनवरी और उसके बाद गिरफ्तार किए गए इन लोगों की कानूनी और आर्थिक मदद का भी ऐलान किया है। इसके साथ-साथ किसान मोर्चा ने कहा है कि केंद्र सरकार के साथ कई बैठकों के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला है। ऐसे में अब पूरे देश के किसान आंदोलन को तेज किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
केंद्र सरकार बीते साल जून में तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसानों का आंदोलन जून, 2020 से नवंबर तक मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब में चल रहा था। सरकार की ओर से प्रदर्शन पर ध्यान ना देने की बात कहते हुए 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली के लिए कूच कर दिया। इसके बाद 26 नवंबर, 2020 से देशभर के किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर गाजीपुर बॉर्डर और दिल्ली के दूसरे बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं।












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