पंजाब-हरियाणा के बाद अब राजस्थान में फैल रहा है किसानों का आंदोलन, जाति-धर्म भुलाकर एकजुट हो रहे किसान
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन अब राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी अपने पैर पसारने लगा है। राजस्थान में पहले इन कानूनों का विरोध मुख्य रूप से अलवर जिले में शाहजहांपुर और हरियाणा बॉर्डर तक ही सीमित था लेकिन अब अब यह पूर्वी जिलों में भी फैलने लगा है। कुछ जगहों पर कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान संगठन रैली कर रहे हैं और आम सभा कर रहे हैं तो कुछ अन्य इलाकों में कांग्रेस इन प्रदर्शनकारियों की मदद कर रही है।

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राजस्थान के दौसा जिले में इन कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है और प्रदेश में किसान प्रदर्शन का यह मुख्य केंद्र बन रहा है। पिछले एक हफ्ते में यहां पर दो बैठक हो चुकी हैं। प्रदेश किसान संघर्ष समिती के मुखिया हिम्मत सिंह गुज्जर का कहना है कि दौसा में दो बैठके हो चुकी हैं और 5 फरवरी को राजेश पायलट स्टेडियम विशाल ट्रैक्टर रैली का आयोजन करने जा रहे हैं। इसके अलावा करौली, सवाई माधोपुर, भरतपुर जिले में भी रैलियों का आयोजन किया जा रहा है।
हिम्मत सिंह गुज्जर को गुज्जर समुदाय का प्रभावशाली नेता माना जाता है, गुज्जर समाज के लिए आरक्षण की मांग में हिम्मत सिंह की भूमिका काफी अहम रही थी। हिम्मत सिंह का कहना है कि वह कांग्रेस के साथ हैं। किसान आंदोलन किसानों को एकसाथ लेकर आाया है। किसान आंदोलन जाति धर्म से इतर जाट, गुज्जर, मीणा और मुसलमानों को एक मंच पर लेकर आया है। हाल ही में दौसा के मीणा सीमला में जो प्रदर्शन हुआ था उसमे तकरीबन 7000 लोग आए थे।
शाहजहांपुर बॉर्डर की बात करें यहां ग्रामीण किसान मजदूर समिति के संयोजक रंजीत सिंह राजू प्रदर्शनकारियों की अगुवाई कर रहे हैं। राजू का कहना है कि यहां तकरीबन 3000 प्रदर्शनकारी हैं और 200 ट्रैक्टर-ट्रॉली हैं। राजू श्रीगंगानगर के रहने वाले हैं, उनका कहना है कि मैंने श्रीगंगानगर को पिछले साल नवंबर माह में छोड़ दिया था और पहले मैं टीकरी बॉर्डर पर था, लेकिन फिर हम शाहजहांपुर बॉर्डर पर पहुंचे और यहीं डटे हैं। जबतक कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाता है हमारा प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। सरकार ने हर कोशिश करके देख लिया है, किसानों को खालिस्तानी कहा, कहा गया कि हमारे अंदर एकता नहीं है, लेकिन सरकार की ये सारी योजनाएं विफल रही हैं।












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