बदहाल किसान,कौन पोछेगा अन्नदाता के आंसू
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) राजधानी में कल राजस्थान के एक किसान के आत्महत्या करने की घटना ने सारे देश को हिलाकर रखा दिया है। कल ही बिहार में आए तूफान से फसलों को भारी क्षति हुई। कोई माने या ना माने पर देश के अन्नदाता की फिक्र करने वाला कोई नहीं है। उसके दुख-दर्द दूर करने के वादे तो होते हैं चुनावी सभाओं। उसके बाद सब भूला दिया जाता है।
बहरहाल,राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बिहार के विभिन्न जिलों में आये शक्तिशाली तूफान के कारण लोगों की मृत्युव पर दुख व्यबक्तभ किया है। मुखर्जी ने कहा 'मुझे बिहार के विभिन्नग जिलों में आये शक्तिशाली तूफान के बारे में पता चला जिसके कारण कई लोगों की मृत्युृ, संपत्ति को नुकसान और कई लोग घायल हुए हैं। हाल ही में भारी बारिश और ओला वृष्टि के कारण उत्तर प्रदेश के किसान बर्बाद हो गए।
हाल के दिनों में मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा वगैरह में बारिश, ओलावृष्टि और तूफान के कारण कितनी फसलें बर्बाद हुईं। दरअसल बारिश, ओलावृष्टि और तूफान ने कानपुर से लेकर अलीगढ़ तक पूरी रबी की फसल को नष्ट कर दिया है। किसानों को इस संकट से निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन से लेकर केन्द्र सरकार के पास कोई आपात योजना नहीं है।
कटने को थी अरहर
गेहूं, चना, सरसों और अरहर की फसल कटने को तैयार थी लेकिन इस बारिश ने सारी फसल स्वाहा कर दी। पिछले साल बारिश नहीं हुई थी इसलिए खरीफ की फसल चौपट हुई थी अब रही-सही कसर मार्च की इस बारिश ने पूरी कर दी।
जानकार कहते हैं कि सरकार को किसानों के आंसुओं को पोंछना होगा इस संकट की घड़ी में।यह देश की बदनसीबी है कि रबी के सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र मौसम की भारी मार का शिकार हो रहा है।
मौसम की मार
लेकिन मौसम की इस मार का खामियाजा सिर्फ किसान को ही नहीं भुगतना पड़ेगा वरन शहरी मध्यवर्ग भी खाद्यान्नों की बढ़ी कीमतों के लिए और भुगतान को तैयार रहे। सरकार अभी से चेत जाए तो किसान और मध्यवर्ग दोनों की नुकसान की कुछ भरपाई तो की ही जा सकती है।













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